Friday, May 20, 2022
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‘कोरोना के हवा में फैलने’ वाले शोध को लेकर न हो परेशान, यहां पढ़े क्यों?

  • Updated on 7/9/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस को लेकर हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन को 200 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने एक पत्र जारी कर कहा कि अब हवा में भी कोरोना वायरस फैल सकता है।

इस पत्र में बताया गया है कि हवा में मुंह से निकले पानी की छोटी-छोटी बूंदे (ड्रॉपलेट), जो अक्सर गाना गाने, बात करने और जोर से सांस लेकर छोड़ने पर निकलते हैं। इन पानी की हल्की बूंदों में ही कोरोना वायरस होता है जो हवा में मौजूद रहता है, लेकिन ये अस्थाई रूप से होता है।

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डब्लूएचओ द्वारा दी गई इस जानकारी के बाद लोगों में घबराहट देखी जा रही है। लोगों का सोचना है कि अब हवा में भी संक्रमण है इसलिए खतरा दोगुना हो गया है। लेकीन हम आपको बता देते हैं कि इससे डरने की नहीं बल्कि इसे समझ कर उपाय करने की जरूरत है।

विशेषज्ञों ने क्या कहा
कोरोना के हवा में फैलने को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि इस शोध से घबराने की जरूरत नहीं है। इस शोध में वैज्ञानिक सिर्फ यही कहना चाहते हैं कि ये वायरस हवा में सिर्फ कुछ देर के लिए ही रहते हैं, यानी अस्थाई रूप से। खतरा तब ज्यादा है जब हवा चल रही हो और आस-पास लोग बातचीत कर रहे हों।

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लेकिन अमूमन ऐसा नहीं होता। हालांकि बेहतर ये है कि मास्क पहनने की आदत डाली जाए और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाए।

यहां पढ़ें कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें...

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