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रोहिंग्या शरणार्थियों की सुध लेने वाला कोई नहीं 

  • Updated on 7/29/2019

जल्द ही म्यांमार (Myanmar) के अधिकारी बंगलादेश (Bangladesh) के कॉक्स बाजार शरणार्थी कैम्पों में आकर वहां रह रहे रोहिंग्या मुस्लिमों (Muslim) से कहने वाले हैं कि वे अपने देश लौट सकते हैं। बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना खुश हैं कि इन शरणार्थियों को वापस बुलाने के लिए म्यांमार पर दबाव डालने में चीन का समर्थन हासिल करने में वह सफल रही हैं। 

बंगलादेश को आशा है कि सितम्बर महीने से शरणार्थियों की वापसी सम्भव हो सकती है परंतु रोहिंग्या म्यांमार में रखाइन राज्य की खूनी धरती पर लौटना नहीं चाहते। इसकी वजह इन शरणार्थियों द्वारा म्यांमार में झेली गई हिंसा है जिसमें उन्होंने अपने घर और परिवार गंवा दिए और किसी तरह जान बचा कर बंगलादेश में शरण ली। 

गत वर्ष जब से शरणार्थियों को बंगलादेश से वापस म्यांमार भेजने की खबरें आने लगीं, शरणार्थी शिविरों में डर और आशंका का माहौल बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार समूह कह चुके हैं कि किसी को भी जबरन वापस न भेजा जाए क्योंकि म्यांमार में अभी स्थिति सुरक्षित नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि म्यांमार के सैन्य अभियानों में भी नरसंहार जैसी स्थिति कैसे बन गई इसकी जांच होनी चाहिए, वहीं म्यांमार की सेना का दावा है कि उन्होंने केवल विद्रोहियों को ही निशाना बनाया। 

म्यांमार और बंगलादेश इस बात पर एकमत हुए थे कि इन शरणार्थियों को धीरे-धीरे वापस म्यांमार भेजना चाहिए परंतु हाल ही में सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर एक ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक ‘ऑस्ट्रेलियाई सामरिक नीति संस्थान’ (Australian Strategic Policy Institute) ने जानकारी दी है कि म्यांमार ने अपने लाखों रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों की वापसी के लिए काफी कम तैयारियां की हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार रोहिंग्या मुस्लिमों की पहले की बस्तियों में पुनर्निर्माण का कोई संकेत नहीं है जबकि कुछ क्षेत्रों में भवनों का विनाश जारी है। 

रखाइन राज्य में आतंकी समूह अराकान आर्मी तथा सेना के बीच जारी लड़ाई के चलते स्थिति और विकट हो गई है। म्यांमार की सीमा पर एक स्थायी शरणार्थी तथा सुरक्षा संकट पैदा हो चुका है जिसे सुलझाने में पश्चिमी देश सक्षम नहीं हैं, चीन का दबदबा तो है परंतु इसमें उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है। जहां तक भारत की बात है उसने यह विपदा देखी और झेली है जब 1971 में भारत में पाक पीड़ित बंगलादेशी शरणाॢथयों का आना हुआ था। ऐसे में रोङ्क्षहग्या बिना देश, बिना घर कब तक रहेंगे कोई नहीं कह सकता।


 

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