Sunday, Nov 27, 2022
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नोम चोम्स्की, राजमोहन गांधी ने की उमर खालिद को जेल से रिहा करने की मांग 

  • Updated on 7/3/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बुद्धिजीवी नोम चोम्स्की, महात्मा गांधी के पोते राजमोहन गांधी और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद को‘‘कैद‘’में रखे जाने की निंदा की है। हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल, दलित सॉलिडेरिटी फोरम और इंडिया सिविल वॉच इंटरनेशनल ने चोम्स्की और गांधी के साथ खालिद को रिहा करने की मांग की, जो 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तारी के बाद से हिरासत में हैं। 

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प्रख्यात बुद्धिजीवी-कार्यकर्ता चोम्स्की और यूनिर्विसटी ऑफ इलिनॉय में रिसर्च प्रोफेसर गांधी ने शनिवार को वीडियो बयान जारी करके खालिद को कैद में रखे जाने की निंदा की। चोम्स्की ने पहले से रिकॉर्ड अपने बयान में कहा कि दमन और ङ्क्षहसा के इस दौर में खालिद का मामला‘‘उन कई मामलों में से एक है, जिनमें भारत की न्याय व्यवस्था का खराब चेहरा सामने आया है। स्वतंत्र संस्थान कमजोर होते दिख रहे हैं...धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की भारत की सम्मानजनक परंपरा को खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी प्रयास किए जा रहे हैं।‘‘ 

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गांधी ने कहा कि खालिद के रूप में भारत के पास एक बेहद प्रतिभाशाली व्यक्ति है, लेकिन उन्हें लगातार 20 महीने से चुप कराकर रखा गया है। उन्होंने कहा कि खालिद को चुप कराया जाना दुनिया के सामने भारत की छवि पर एक धब्बा है। गांधी ने कहा,‘‘उमर और अन्य हजारों लोगों की हिरासत का हर गुरजता दिन दुनिया में लोकतंत्र, मानवीय गरिमा और भारत के अच्छे नाम के लिए एक नया झटका है।‘‘ 

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दिल्ली की एक अदालत ने फरवरी 2020 में हुए दंगों से संबंधित कथित साजिश के मामले में इस साल मार्च में खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि उनके खिलाफ आरोप प्रथम ²ष्टया सही हैं, यह मानने के लिए उचित आधार हैं। खालिद के खिलाफ दंगों की साजिश रचने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 700 से अधिक लोग घायल हो गए थे। 

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