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not everyone can be dhoni, who fulfills the dream of ''''''''god''''''''

World Cup: हर कोई धोनी नहीं हो सकता, जो पूरा कर दे 'भगवान' का सपना

  • Updated on 7/12/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। विश्व कप (ICC World Cup 2019) के पहले सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड (New Zealand) के हाथो हार के बाद भारत (India) के विश्व कप जीतने का सपना फिर टूट गया है। इस मैच में भारत ने कई गलतियां की। पहले तो भारत के टॉप ऑर्डर बल्लेबाज सस्ते में ही पवेलियन लौट गए। विराट कोहली (Virat Kohli), रोहित शर्मा (Rohit Sharma) और केएल राहुल (KL Rahul) एक-एक रन बनाके आउट हो गए। ऋषभ पंत (Rishabh pant) ने 32 रन की एक जुझारू पारी खेली पर वो भी जल्द ही आउट हो गए। फिर धोनी (MS Dhoni) और जडेजा (Ravindra Jadeja) ने पारी को संभाला। धोनी ने 50 और जडेजा ने 77 रनों की पारी खेली पर वो भारत को जीत दिलाने में नाकामयाब रहे। इस मैच के बाद धोनी की जमकर आलोचना हो रही है। धोनी की ये आलोचना होना क्या सही है। आज हम आपको धोनी की भारतीय टीम के लिए उपयोगिता के बारे में बताने जा रहे हैं।

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1. टीम में धोनी का रोल

धोनी सिर्फ बैटिंग की वजह से टीम में नहीं हैं। कितनी बार होता है जब कोई कप्तान बांउड्री लाइन पर फील्डिंग करता है? भारतीय टीम में लगभग हर मैच में क्योंकि कप्तान कोहली को मालूम है कि विकेट के पीछे से धोनी लगातार गेंदबाज़ों से बात करते रहते हैं और फील्ड चेंज भी जरूरत पड़ने पर करते हैं।

टीम के स्पिनर्स युज़वेंद्र चहल और कुलदीप यादव की सफलता में भी धोनी का सबसे बड़ा हाथ है। गेम को रीड करने में और बल्लेबाजों को पढ़ने में धोनी की कोई सानी नहीं है। वो समझ जाते हैं कि बल्लेबाज क्या करना चाह रहा है और उसी हिसाब से गेंदबाजों को बॉल डालने की सलाह देते हैं जिसका सीधा फायदा उन्हें मिलता है।

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2. धोनी को नहीं मिला जीत का तोहफा

माना जा रहा है कि ये महेंद्र सिंह धोनी का आख़िरी विश्व कप है। ऐसे में तमाम भारतीय खिलाड़ी उन्हें विश्व कप में ख़िताबी जीत का तोहफा देना चाहते थे पर न्यूजीलैंड की टीम ने इस पानी फेर दिया। धोनी ने भी तो अपनी कप्तानी में साल 2007 में टी-20 विश्व कप और साल 2011 में आईसीसी विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट जिताकर भारत को असीम खुशियां दी हैं और सचिन तेंदुलकर को विश्व खिताब के साथ एक शानदार विदाई दी।

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3. धोनी की है विकेट के पीछे बिजली सी रफ्तार 

38 साल की उम्र में जब किसी भी खिलाड़ी की आंखे कमजोर होने लगती हैं और रन लेते समय क़दमों की रफ्तार भी धीमी होने लगती है, वहीं धोनी आज भी विकेट के पीछे दूसरे विकेट कीपरों के मुकाबले सबसे तेज-तर्रार है। इतना ही नहीं विकेट के बीच में दौड़ में तो वह कई युवा खिलाड़ियो को भी पानी पिलाने की क्षमता रखते है।विकेट के पीछे धोनी आज भी बल्लेबाज के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। पलक झपकते ही स्टंप करने में उनका कोई सानी नही है।

4. क्या धीमे हो गए हैं धोनी?

इस विश्व कप में भले ही धोनी की धीमी बल्लेबाजी को लेकर आलोचना के सुर सुनाई दे रहे हैं लेकिन सब यह भी जानते है कि भारत का टॉप ऑर्डर बिखर चुका था वैसे में अगर धोनी भी जल्दी आउट हो जाते तो क्या होता। लेकिन हार तो आखिर हार ही होती है। वैसे टूर्नामेंट में धोनी स्ट्राइक रेट 93 का है जिसे धीमा नहीं कहा जा सकता है। यानी वो हर सौ गेंदों पर 93 रन बना रहे हैं।

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5. विराट जानते हैं धोनी की अहमियत

सबसे बड़ी बात भारत के कप्तान विराट कोहली जानते हैं कि महेंद्र सिंह धोनी की टीम में क्या अहमियत है, तभी तो कोहली मानते हैं कि धोनी को सलाह देने की कोई जरूरत नही। धोनी ख़ुद जानते हैं कि उन्हें किस समय क्या करना है। ये सिर्फ़ कहने की बात नहीं बल्कि मैदान पर भी दिखता है। जब टीम गेंदबाज़ी करती है तो बॉलर को सलाह देना, फील्डिंग में बदलाव करना और यहां तक कि डीआरएस लेने या न लेने के फैसले में भी धोनी की राय सबसे अहम होती है। उनकी मौजूदगी के कारण ही कप्तान विराट कोहली बाउंड्री पर फील्डिंग करते दिखते हैं। यानी कप्तान न होकर भी धोनी कप्तान का रोल निभाते हैं।

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6. धोनी के चौंकाने वाले फैसले

अब इसे इत्तेफाक ही कहा जाएगा कि धोनी न तो सैयद किरमानी की तरह कलात्मक और परंपरागत तरीके से विकेट कीपिंग करते है और न ही फारूख इंजीनियर की तरह धुआंधार सलामी बल्लेबाज हैं। इसके बावजूद धोनी भारत के सबसे कामयाब विकेट कीपर होने के साथ-साथ कामयाब बल्लेबाज और कप्तान भी रहे हैं। धोनी हमेशा चौंकाने वाले निर्णय लेते हैं। कुछ ऐसा ही तब हुआ जब उन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के टेस्ट क्रिकेट में कप्तानी की टोपी विराट कोहली के सिर रख दी।  इसके बाद उन्होंने एकदिवसीय और टी-20 में भी कप्तानी छोड़ दी और टेस्ट क्रिकेट को तो उन्होंने अलविदा कह ही दिया था।

एक कप्तान के तौर पर उन्होंने आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स को तीन बार चैंपियन बनाया। उन्हीं की कप्तानी में भारत ने पहली बार आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती तो पहली बार आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में भी नंबर एक बनाया। हो सकता वो सेमीफाइनल में हार के बाद तुरंत संन्यास का ऐलान कर दे पर ये हो सकता है इसपे बहस करना अभी ठीक नहीं लगता है। 

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7. माही नहीं तो मुमकिन नहीं 

धोनी के खाते में ढ़ेरों कामयाबियां हैं तो ढ़ेरों किस्से भी हैं। आईपीएल में उनकी टीम चेन्नई सुपर किंग्स को स्पॉट फिक्सिंग जैसे तथाकथित मामलों में फंसकर दो साल के लिए आईपीएल से बाहर होना पड़ा। लेकिन धोनी ने साल 2018 में उसकी वापसी लगभग अपने ही दम पर चैंपियन बनाकर की।

धोनी पर यह भी आरोप लगे कि उनकी वजह से ही गौतम गंभीर, वीरेंद्र सहवाग, वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ को टेस्ट क्रिकेट छोडना पड़ा। लेकिन यह भी सच है कि धोनी की कप्तानी में ही विराट कोहली, रोहित शर्मा और दूसरे खिलाडी भी जमकर चमके। रोहित शर्मा को तो एकदिवसीय क्रिकेट में सलामी बल्लेबाज़ धोनी ने ही बनाया। 

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8. क्यों है धोनी 'कैप्टन कूल'?

आज भी उनके कंधो पर मैच फिनिशर की जिम्मेदारी है। वक्त के साथ धोनी कभी आह तो कभी वाह से दो चार होते रहते हैं लेकिन मैदान पर शायद ही कभी उन्होंने किसी अवसर पर दूसरे खिलाड़ियो की तरह जोश में बल्ला घुमाया हो या मैच जिताने के बाद खुशी से उछले हों।इसी लिए वो 'कैप्टन कूल' कहलाते रहे हैं। धोनी के बारे में इतना कुछ कहा सुना जा चुका है कि कोई भी बात नई नहीं लगती। लेकिन इसके बावजूद जब भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर अक्सर कहते हैं- वो चाहते हैं कि उनकी आंखों के सामने हमेशा वह समां रहे जब धोनी ने साल 2011 का विश्व कप फाइनल श्रीलंका के खिलाफ छक्का जमाकर जिताया था तो शायद इससे बड़ी बात कोई और नहीं हो सकती.

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9. कौन लगाएगा आखिरी गेंद पर छक्का?

कभी अपने लंबे बालों के कारण पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ से तारीफ बटोरने वाले धोनी छक्का लगाकर मैच जिताने में भी माहिर माने जाते रहे। वैसे भी धोनी ने न जाने कितने मैच इस अंदाज में भारत को जिताए हैं। उम्मीद है उनकी जिदगी का एक और नया पन्ना उनकी कामयाबी का नया इतिहास लेकर आएगा। 

 

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