Friday, Jan 24, 2020
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सिर्फ मलेरिया नहीं, इन बड़ी बीमारियों की वजह बनते हैं मच्छर

  • Updated on 9/6/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। आप चाहे जिस जगह हों, आपकी जिंदगी का सबसे अहम प्राणी है मच्छर। इसलिए मच्छर के बारे कुछ तथ्य आपको जानने ही चाहिए। मच्छरों के काटन से सिर्फ डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां ही नहीं होती बल्कि बड़े-बड़े रोग होते हैं। आइए जानते हैं कौन से हैं वो रोग।

पीला बुखार

स्टैगोमिया मच्छर के काटने से पीला बुखार होता है, क्योंकि चूंकि ये ज्यादातर बंदरगाहों के आस-पास पाए जाते है इसलिए इन्हें बन्दर-मच्छर भई कहा जाता है। पीत ज्वर के लक्षण कुछ-कुछ पीलिया जैसे होते हैं। इस बीमारी के लक्षणों में बुखार, सिर और पीठ में दर्द, मितली, और उल्टी शामिल हैं। इसका असर लीवर पर सबसे ज्यादा पड़ता है। बीमारी बढ़ने पर खून की उल्टियां आने लगती हैं। 

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फाइलेरिया

फाइलेरिया कहे या हाथीपांव। फाइलेरिया बीमारी का संक्रमण आमतौर से बचपन में होता है। मगर इस बीमारी के लक्षण 7 से 8 वर्ष के उपरान्त ही दिखाई देते हैं। क्यूलेक्स मच्छर जिसके कारण फाइलेरिया का संक्रमण फैलता है आम तौर पर शाम और सुबह के वक्त काटता है। ये मच्छर फ्युलेक्स एवं मैनसोनाइडिस प्रजाति के होते हैं। जिसमें मच्छर एक धागे समान परजीवी को छोड़ता है। यह परजीवी हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है। 

जापानी इन्सेफेलाइटिस

ये दिमागी बुखार का एक प्रकार है, जो सूअरों और मच्छरों से फैलता है। शरीर के संपर्क में आते ही वायरस दिमाग की ओर जाने लगता है, जिसका असर सोचने, समझने, देखने और सुनने की ताकत पर पड़ता है। इसका असर 1 से 14 साल के बच्चों और 65 से ज्यादा की उम्र के लोगों पर ज्यादा होता है।

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बच्चों में इसके लक्षण ज्यादा देर तक रोना, भूख की कमी, बुखार और उल्टी के रूप दिखते हैं। वृद्ध लोगों में इसके लक्षण बुखार, सिरदर्द, गरदन में अकड़, कमजोरी के रूप में दिखते हैं। इससे बचाव और इससे डरना जरुरी इसलिए भी है क्योंकि इससे ग्रसित 50 से 60 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। भारत में इसका असर बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश में ज्यादा दिखता है।
 

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