Tuesday, Nov 29, 2022
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नहीं रहे विख्यात कवि कृष्ण मित्र, गाजियाबाद के निजि अस्पताल में ली आखरी सांस

  • Updated on 11/24/2022

 नई दिल्ली/टीम डिजीटल। अपनी ओजपूर्ण कविताओं से गाजियाबाद का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने वाले विश्व विख्यात कवि कृष्ण मित्र ने गुरुवार को महानगर के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। जनकवि के निधन पर महानगर में शोक की लहर फैल गई। उनके निधन पर तमाम पत्रकारों, बुद्धिजीवियों व साहित्यिकारों ने शोक जताया है। कथाकार सेरा यात्री ने कहा कि उनके निधन के साथ ही उनकी मित्रता का सात दशक पुराना सेतु का अचानक धराशाई हो जाना दुखदाई है। कृष्ण मित्र भारत-पाक विभाजन के बाद 1946 में गाजियाबाद आए थे। वह इस शहर के तमाम उतार-चढ़ाव और उपलब्धियों के साक्षी रहे। कृष्ण लाल को मित्र उपनाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने दिया था। बाबरी मस्जिद प्रकरण, विमान अपहरण, पोखरण परीक्षण और कारगिल युद्ध जैसे मौके पर चली उनकी लेखनी अपनी एक अलग पहचान रखती है।
 

उनके निधन पर गोविन्द गुलशन, दीक्षित दनकौरी, डॉ. रमा सिंह, अतुल सिंहा, सुभाष चंदर, आलोक यात्री, रवि अरोड़ा, डॉ. तारा गुप्ता, डॉ. वीना मित्तल, तरुणा मिश्रा, नेहा वैद, रविन्द्र कांत त्यागी, डॉ पूनम सिंह, डॉ अशोक मैत्रेय, मनीषा गुप्ता, सुरेंद्र सिंघल, कमलेश भट्ट कमल, मधु जोशी, मीरा शलभ, डॉ बीना शर्मा, मनु लक्ष्मी मिश्रा, अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव, अनिमेष शर्मा आदि ने शोक जताया। 
 

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