Monday, Aug 08, 2022
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साल 2021 में मास्क की तरह वैक्सीन पासपोर्ट भी दिखाना हो सकता है जरूरी? जानिए क्या है ये Passport

  • Updated on 12/29/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वैक्सीन फाइजर को ब्रिटेन (Britain) ने सबसे पहले मंजूरी दी थी उसके बाद अमेरिका, कनाडा, पूरे यूरोप और पश्चिमी एशिया के कुछ देशों में भी वैक्सीन को लगाए जाने को लेकर काम शुरू हो चुका है। इसलिए यह मुमकिन है कि इसका असर 2021 में इंटरनेशनल ट्रैवल पर भी पड़ेगा। 

इस बारे में सीएनएन की रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की तरह वैक्सीन पासपोर्ट यानी डिजिटल हेल्थ पास होने भी जरूरी हो सकते हैं। 

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ट्रेवल के लिए जरूरी पासपोर्ट 
बहुत संभव है कि आने वाले समय में इंटरनेशनल ट्रैवल, किसी कार्यक्रम में शामिल होने, मूवी थिएटर में प्रवेश करने के लिए आपको अपना कोविड स्टेटस दिखाना पड़े। जरूरी नहीं कि वैक्सीन पासपोर्ट आपका वैक्सिनेशन कार्ड की तरह की हो। ये भी हो सकता है कि यह मोबाइल ऐप की तरह आपके मोबाइल में रहे।

इस मोबाइल एप पर कोविड टेस्ट की डिटेल और वैक्सिनेशन की जानकारी अपलोड करनी होगी और हो सकता है कि ट्रेवल के दौरान जब आप से पूछा जाएगा, तो ऐप पर इसे आपको दिखाना होगा। जैसे आरोग्य सेतू एप काम करती है लेकिन यह इसका अपर वर्जन हो सकता है। 

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डिजिटल हेल्थ पास
इस नई एप में हर यूजर को एक क्यूआर कोड के रूप में पास मिलता है जिसे अथॉरिटीज के पास दिखाया जा सकता है। इसी तरह की एप कॉमन ट्रस्ट नेटवर्क बनाने में जुटा रहा है जिसमें वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम जुड़ा रहेगा जो कई एयरलाइंस से हाथ मिला चुका है।

कुछ ऐसा ही आईबीएम ने भी डिजिटल हेल्थ पास नाम से ऐप बनाया है। इस ऐप से कंपनियां अपने यहां एंट्री देने से पहले किसी भी व्यक्ति की जरूरी हेल्थ डिटेल्स चेक कर सकती हैं। लेकिन इस ऐप को लेकर सीएनएन की रिपोर्ट में बताया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का इस ऐप  के बारे में कहना है कि कुछ देशों ने अपने यहां आने देने के लिए अनुमति दी है लेकिन उसके लिए उनके पास वैक्सीन पासपोर्ट होने की अनिवार्यता रखी गई है लेकिन डब्लूएचओ ने इसे कारगार नहीं बताया है। 

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लेकिन हो सकती है मुश्किल 
अभी यह यकीनी तौर पर कहा नहीं जा सकता कि जिन्हें कोविड हो चुका है, उन्हें दोबारा संक्रमण नहीं होगा। ऐसे में ऐसे किसी इम्यूनिटी सर्टिफिकेट या पासपोर्ट से इन्फेक्शन फैलता ही रहेगा।

इसके साथ ही संगठन का यह भी कहना है कि यह चिंता का विषय है कि हर वैक्सीन का असर एक जैसा नहीं है। कुछ वैक्सीन का असर 80% है और कुछ का इससे अधिक। जैसे चाइनीज कंपनी साइनोफार्म की वैक्सीन का असर 86 पर्सेंट है जबकि फाइजर और मॉडर्ना की 94 पर्सेंट हैं।

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इसके अलावा और सबसे जरूरी यह है कि ये ऐप सिर्फ स्मार्टफोन पर ही मिल सकते हैं, जो कि सभी के पास होना संभव  नहीं है। इसलिए यह भी ध्यान देना होगा कि यह सबके लिए किफायती नहीं है।

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