Monday, May 23, 2022
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अब पढें गुमनाम महिला स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियां

  • Updated on 1/27/2022

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। यह पुस्तक उन महिलाओं के जीवन को बयां करती है जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अभियान का नेतृत्व किया और पूरे देश में विरोध और विद्रोह की ज्वाला जलाई। इसमें उन रानियों की कहानियां हैं जिन्होंने साम्राज्यवादी शासन के खिलाफ संघर्ष में औपनिवेशिक शक्तियों से लडाई लडी और मातृभूमि के लिए अपनी जान को समर्पित कर दिया। उक्त बातें केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी ने आजादी का महोत्सव के तहत भारत की गुमनाम महिलाओं पर सचित्र पुस्तक का विमोचन करते हुए कही। इस किताब को अमर चित्रकथा के साथ साझेदारी में जारी किया गया है।
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भारतीय संस्कृति में लैंगिक भेदभाव की जगह नहीं थी: मीनाक्षी लेखी
मीनाक्षी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं का सम्मान व लैंगिक भेदभाव की जगह नहीं थी। तभी महिलाएं युद्ध में सैनिकों की तरह लडने का साहस और शारीरिक शक्ति आजमा पाती थीं। इस पुस्तक में शामिल कुछ गुमनाम महिला नायकों की वीरता की दास्तान सुनाते हुए लेखी ने कहा कि महिलाएं अभिव्यक्ति में समान रूप से मुखर थीं। जैसे रानी अब्बक्का ने कई दशकों तक पुर्तगालियों को हमलों से खदेडा। उन्होंने अमर चित्रकथा की टीम को इस दौरान धन्यवाद देते हुए कहा कि अमर चित्रकथा ने वर्षों से बच्चों में चरित्र निर्माण और उन्हें संस्कार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें 75 गुमनाम नायिकाओं की सचित्र कहानियां है। वहीं दूसरा संस्करण 25 गुमनाम आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों पर होगा जो प्रक्रिया में है। तीसरा और अंतिम संस्करण अन्य क्षेत्रों के 30 गुमनाम नायकों पर आधारित होगी।
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जाने कौन-कौन है ये नायिकाएं
रानी अबक्का, वेलु नाचियार, शिवगंगा, झलकारी बाई, मतांगनी हजारा, गुलाब कौर, चक्काली इल्लम्मा, पद्मजा नायडू, बिश्नी देवी शाह, सुभद्रा कुमारी चैहान, दुर्गावती देवी, सुचेता कृपलानी, अक्कमा चेरियन, अरूणा आसिफ अली, दुर्गाबाई देशमुख, रानी गायडिन्लियू, ऊषा मेहता, पार्वती गिरी, तारकेश्वरी सिन्हा, स्नेहलता वर्मा, तिलेश्वरी बारूआ इत्यादि हैं। इनमें से राजस्थान की तिलेश्वरी बरूआ भारत की सबसे कम उम की शहीदों में से एक थी। जिन्हें मात्र 12 साल की उम्र में भारत छोडों आंदोलन के दौरान अंग्रेजों ने गोली मार दी थी क्योंकि वो एक पुलिस स्टेशन के ऊपर तिरंगा फहराने की कोशिश कर रही थीं।

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