इस नई तकनीक से अब बिना चीड़-फाड़ होगा पोस्टमार्टम

  • Updated on 1/24/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 'ऑटोप्सी' यानी शव परीक्षा। जब किसी व्यक्ति की किसी दुर्घटना में मौत हो जाती है तो उसकी ऑटोप्सी की जाती है। व्यक्ति की मौत का कारण जानने के लिए इस प्रक्रिया में शरीर की चीड़-फाड़ की जाती है।  

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मृत व्यक्ति के परिवार के लोग अक्सर इस प्रक्रिया के लिए तैयार नहीं होते। लेकिन नियमों के अनुसार ऐसा करना जरूरी होता है। लेकिन अब आपके लिये एक राहत भरी खबर है, क्योंकि अब मृतक की पोस्टमार्टम के दौरान चीड़-फाड़ नहीं होगी। एम्स और आईसीएमआर ऐसी तकनीक पर काम कर रहे, जिससे बिना चीड़-फाड़ के ऑटोप्सी की जा सकेगी। एम्स के प्रोफेसर और फॉरेंसिक मेडिसिन के डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने बताया कि कई परिवार इस प्रक्रिया के लिए तैयार नहीं होते। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

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डॉ गुप्ता और उनकी टीम इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के साथ मिलकर एक ऐक्सपेरिमेंट करने जा रही है, जिसमें ऑटोप्सी को वर्चुअली कंडक्ट किया जाएगा। बता दें कि इस प्रक्रिया को स्विटजरलैंड के अलावा कई पश्चिमी देशों में पहले से फॉलो किया जा रहा जा रहा है। 

क्या है वर्चुअल ऑटोप्सी
इस प्रक्रिया में मृत शरीर को बिन टच किये जांचा जाता है। इसके जरिये शरीर को एक बैग में पैक किया जाता है, जिसके बाद उसे एक सीटी स्कैन मशीन में रखा जाता है और फिर कुछ सेकंड के भीतर, आंतरिक अंगों की हजारों कैप्चर की जाती हैं, जिनका आगे फॉरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा विश्लेष्ण किया जाता है।

डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि हालांकि इस प्रोजेक्ट में काफी निवेश करने की जरूरत है। क्योंकि सीटी स्कैन की मशीनें काफी महंगी आती हैं। वर्चुअल ऑटोप्सी में मृत व्यक्ति के रिकॉर्ड डिजिटल फॉर्मेट मं उपलब्ध होते हैं और इस तरह एक ही शरीर पर अन्य फॉरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा विश्लेषण किया जा सकता है।

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