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आर्टीफिशियल इंटैलीजैंस से और भी बेहतर होगा मरीज का इलाज

  • Updated on 8/6/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। आज के दौर में तकरीबन हर एक व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त है। बीमारी का इलाज करवाने के लिए लोग समय से लेकर पैसों तक सब कुछ खर्चते हैं, लेकिन तब भी कई बार समय से मरीज का इलाज नहीं हो पाता है। 

बीमारी होने से पहले ही सामने आ जाएंगे लक्षण
बीमारी होने से पहले ही इसके लक्षणों का पता लगाने के लिए अब आर्टीफिशियल इंटैलीजैंस तकनीक का उपयोग किया जाएगा जो बीमारी के संकेतों का पता लगाने व समय से इलाज करने में काफी मददगार साबित होगी। आस्ट्रेलियन इंस्टीच्यूट ऑफ हैल्थ इनोवेशन के एसोसिएट प्रोफैसर श्लोमो बर्कोवस्की ने कहा है कि मैडीकल इमेजिंग जैसे कि ब्रेन स्कैन, X-ray, ECG और रैस्पेरेटरी मइयरमैंट को बेहतर बनाने के लिए आर्टीफिशियल इंटैलीजैंस तकनीक की मदद ली जाएगी। 

किडनी की चोट का लग सकेगा पता
गूगल की मालिकाना हक वाली कम्पनी अल्फाबेट ने काफी समय पहले UK की टैक्नोलॉजी कम्पनी Deep Mind को खरीदा था। इस कम्पनी द्वारा अब ऐसी AI Technology को विकसित कर लिया गया है जो बहुत ही कम समय में किडनी की चोट का पता लगा लेगी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक से भी 48 घंटे पहले रिजल्ट दिखाएगी। 

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नई तकनीक का अब तक 7,00,000 अडल्ट पेशैंट्स पर टैस्ट किया गया है और इस दौरान 55.8 प्रतिशत सही रिजल्ट्स प्राप्त हुए हैं। आपको बता दें कि किडनी की चोट एक जानलेवा बीमारी है जिससे अंग अचानक काम करना बंद कर देता है। इसके बारे में पता लगाना भी काफी मुश्किल है। इस बीमारी के जरिए अमरीका में हर साल 3,00,000 से ज्यादा लोग प्रभावित होते हैं। 

वेयरेबल गैजेट्स देते हैं काफी फायदा
बहुत से वेयरेबल कम्प्यूटर्स जैसे कि फिटनैस ट्रैकर्स (Fitness Trackers) और स्मार्ट वॉचिस (Smart watches) मार्कीट में उपलब्ध हैं जिनके जरिए आप अपनी हैल्थ से जुड़े डाटा का पता लगा सकते हैं। ये गैजेट डाटा इकट्ठा करते हैं जिन्हें डॉक्टर (Doctorsको दिखाने पर इलाज करने में काफी मदद मिलती है। 

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तीन गुणा स्पीड से काम करेगी ष्टञ्ज स्कैन
नए AI Scholar नाम के टूल को तैयार किया गया है जो रेडियोलॉजिस्ट्स को तीन गुणा स्पीड से CT स्कैन करने में मदद करेगा। माना जा रहा है कि इस तकनीक से कैंसर के 50 प्रतिशत बेहतर रिजल्ट प्राप्त किए जा सकेंगे। 
AI सिस्टम्स की मदद से बहुत ही जल्दी या यूं कहें तो अर्ली स्टेज पर ही बीमारी का पता लगाया जा सकेगा। इसके जरिए स्किन कैंसर और हड्डियों की मजबूती को लेकर काफी बेहतर तरीके से जाना जा सकेगा। 

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दिल के आकार में बदलाव की मिलेगी जानकारी
दिल के आकार में बदलाव होने से हार्ट अटैक व अन्य गंभीर हृदय संबंधी समस्याएं होती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक हार्ट से जुड़े टैस्ट्स का डाटा अगर आर्टीफिशियल इंटैलीजैंस तकनीक से मापा जाए तो काफी समय पहले ही बीमारी का पता लगाया जा सकता है। वहीं नई AI असिस्टेड इलैक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG) तकनीक हार्ट फेलियर के संकेतों का पता लगाने में मदद करेगी। इस तकनीक का अब तक 6,00,000 रोगियों पर टैस्ट किया जा चुका है और इसने 85 प्रतिशत सही रिजल्ट्स दिए हैं। ऐसे में आने वाले समय में अट्रायल फिब्रिलेशन, अबनार्मल हार्टबीट रिदम और हार्ट फेलियर होने के रिस्क का पता आसानी से लगाया जा सकेगा। 
 

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