अब रिश्वतखोरी का रोग महिलाओं को भी लगा

  • Updated on 1/24/2019

बेशक सरकारी पदों पर बैठे छोटे-बड़े सभी अधिकारी मोटा वेतन पाते हैं परंतु लगातार बढ़ रहे रिश्वत के मामले इस बात के साक्षी हैं कि इनका पेट इतने मोटे वेतनों से भी नहीं भरता। इस कारण अनेक अधिकारी उनके पास काम करवाने के लिए आने वाले लोगों से रिश्वत के रूप में मोटी रकम वसूल करते हैं जिसके चंद ताजा उदाहरण निम्र में दर्ज हैं :  

7 जनवरी को हिमाचल बिजली बोर्ड का बंजार में तैनात एस.डी.ओ. अंकुश अवस्थी 25,000 रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। 

—बटाला के तहसील काम्प्लैक्स में एक पटवारी के कारिंदे प्रताप उर्फ राजू को 12,000 रुपए की रिश्वत की राशि के साथ काबू किया गया। 

—अहमदाबाद महानगरपालिका के इंस्पैक्टर ‘मयंक विपिन लाल मिस्त्री’ एवं सर्वेयर ‘मुकेश गांडालाल परमार’ को 50,000 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।

8 जनवरी को अजमेर में ‘कैटल फीड प्लांट’ का मैनेजर राजेंद्र सिंह एक ठेकेदार के बिल पास करने के बदले 40,000 रुपए रिश्वत लेता गिरफ्तार। 

9 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) के अधिकारियों ने आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में केरल के पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी टी.ओ. सूरज की 8.80 करोड़ रुपए की सम्पत्ति जब्त की। इसमें 4 वाहन, 13 अचल सम्पत्तियां और 23 लाख रुपए नकद शामिल हैं।

—दमोह में सहायक राजस्व अधिकारी 10,000 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। 

10 जनवरी को ‘एंटी करप्शन’ विभाग आगरा ने पशु पालन विभाग के कनिष्ठï सहायक उपेंद्र कुमार को चतुर्थ श्रेणी के एक कर्मचारी की अटकी हुई पैंशन जारी करने के बदले 3000 रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। 

10 जनवरी को लोकायुक्त पुलिस, इंदौर ने शिक्षा विभाग के अंतर्गत जिला परियोजना समन्वयक कार्यालय, धार में कार्यरत लेखापाल कल्याण शर्मा को 16,000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचा। 

10 जनवरी को बिहार की राजधानी पटना में सी.बी.आई. की टीम ने एक राइस मिल मालिक को ऋण देने के बदले में 50,000 रुपए रिश्वत लेते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के आंध्रा बैंक के सीनियर मैनेजर संदीप कुमार को पकड़ा। 

11 जनवरी को उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में पंचायती राज अधिकारी कमल किशोर को 20,000 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। 

12 जनवरी को गुजरात के वड़ोदरा में सी.बी.आई. ने ई.पी.एफ.ओ. में कार्यरत प्रवर्तन अधिकारी रजनीश तिवारी को एक व्यक्ति से 5 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 20 दिसम्बर को इसी विभाग में महिला एन्फोर्समैंट अधिकारी के रूप में कार्यरत रजनीश तिवारी की पत्नी पारू तिवारी को एक व्यक्ति से एक लाख रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था।

12 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग में कार्यरत कार्यकारी अभियंता एल. रघु की 1.92 करोड़ रुपए की सम्पत्ति जब्त की।

13 जनवरी को महाराष्ट्र के परभनी में जिला अस्पताल के मैडीकल आफिसर डा. गजानन काले तथा उसके सहायक को एक महिला का आप्रेशन करने के बदले में उससे 8000 रुपए रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

14 जनवरी को मोगा के निकट घल्लकलां के पटवारी छिंदर सिंह को एक किसान से 4000 रुपए रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा गया।

15 जनवरी को अर्बन एस्टेट पुलिस चौकी पटियाला में तैनात ए.एस.आई. शीशपाल को 10,000 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। 

20 जनवरी को पंजाब पुलिस के एक हैड कांस्टेबल को शिकायतकत्र्ता से 50,000 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।

22 जनवरी को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने बिहार के सिमरही में एक बैंक मैनेजर अमर कुमार को 50,000 रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। 

22 जनवरी को ही विजीलैंस ब्यूरो ने म्यूनिसिपल कार्पोरेशन, हिसार में कम्प्यूटर आप्रेटर कुलदीप सिंह को एक शिकायतकत्र्ता को एन.ओ.सी. देने के बदले में उससे 2500 रुपए रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा। 

मात्र पंद्रह दिनों के उपरोक्त उदाहरणों से स्पष्टï है कि भारत में तमाम कानूनों और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के सरकारी दावों के बावजूद रिश्वतखोरी एक नासूर बन चुकी है। स्पष्टï है कि भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों में संशोधन और सरकारी व गैर सरकारी  प्रतिष्ठानों में विजीलैंस विभाग की सक्रियता के बावजूद रिश्वत के लेन-देन के मामले थमने की बजाय लगातार बढ़ ही रहे हैं।

यह बुराई तब तक दूर होने वाली नहीं है जब तक भ्रष्टïाचार के आरोप में पकड़े गए आरोपियों के मामलों का शीघ्र निपटारा करके उन्हें जल्द से जल्द अधिकतम शिक्षाप्रद दंड देने का सिलसिला शुरू नहीं किया जाता।   —विजय कुमार 

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