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असम में NRC नागरिकता लिस्ट जारी, 40 लाख लोगों का नाम नहीं

  • Updated on 7/30/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का बहु-प्रतीक्षित दूसरा एवं आखिरी मसौदा 2.9 करोड़ नामों के साथ आज जारी कर दिया गया है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे पूरी तरह ‘निष्पक्ष’ बताते हुए कहा कि जिनका नाम इसमें नहीं है उन्हें घबराने की जरुरत नहीं है।

एनआरसी में शामिल होने के लिए असम में 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन दिया था। भारतीय महापंजीयक शैलेश ने कहा कि इस ऐतिहासिक दस्तावेज में 40.07 लाख आवेदकों को जगह नहीं मिली है। यह ‘ऐतिहासिक दस्तावेज’ असम का निवासी होने का प्रमाण पत्र होगा।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनआरसी जारी होने के मद्देनजर एहतियातन राज्य के सभी 33 जिलों में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेद्याज्ञा लागू कर दी गई है। राज्य में सभी एनआरसी सेवा केंद्रों में अंतिम मसौदा उपलब्ध है।

आवेदक एनआरसी की वेबसाइट पर भी इसे देख सकते हैं या 2437 टॉल फ्री नंबर असम के लिए 15107 और असम के बाहर के लिए 18003453762 पर फोन कर सकते हैं तथा अपना 21 अंकों का एप्लीकेशन रिसीप्ट नंबर बताकर जानकारी हासिल कर सकते हैं।

करीब 40.07 लाख आवदेकों को शामिल ना किए जाने पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए एनआरसी के प्रदेश समन्वयक प्रतीक हाजेला ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार यह प्रक्रिया पूरी की गई है। उन्होंने बताया कि चार श्रेणियों के लोगों संशयशील मतदाता, उनकी संतानों, जिन लोगों के मामले विदेशी न्यायाधिकरण में लंबित हैं और उनकी संतानों को सूची में शामिल नहीं किया गया है।

हाजेला ने यह भी कहा कि लोग सेवा केंद्रों में सूची में शामिल होने के लिए फिर से आवेदन कर सकेंगे। उन्होंने कहा, ‘मसौदे के संबंध में दावा और आपत्ति जताने की प्रक्रिया 30 अगस्त से शुरू होगी और 28 सितंबर तक चलेगी। लोगों को आपत्ति जताने की पूर्ण एवं पर्याप्त गुंजाइश दी जाएगी। किसी भी वास्तविक भारतीय नागरिक को डरने की जरूरत नहीं है।’

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असम पहला भारतीय राज्य है जहां असली भारतीय नागरिकों के नाम शामिल करने के लिए 1951 के बाद एनआरसी को अपडेट किया जा रहा है। एनआरसी का पहला मसौदा 31 दिसंबर और एक जनवरी की दरम्यानी रात जारी किया गया था, जिसमें 1.9 करोड़ लोगों के नाम थे। इस विशालकाय काम के लिए जमीनी स्तर पर काम दिसंबर 2013 में शुरू हुआ था और पिछले तीन वर्षों में इस संबंध में उच्चतम न्यायालय में 40 सुनवाई हुई।

एनआरसी की आवेदन प्रक्रिया मई 2015 में शुरू हुई थी और अभी तक पूरे असम से 68.27 लाख परिवारों के द्वारा कुल 6.5 करोड़ दस्तावेज प्राप्त किए गए हैं। अंतिम मसौदा जारी होने के कुछ मिनटों बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह प्रकिया ‘निष्पक्ष और पारदर्शी’ तरीके से पूरी की गई।

उन्होंने नयी दिल्ली में पत्रकारों से कहा, ‘किसी के भी खिलाफ कोई बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसलिए किसी को भी घबराने की जरुरत नहीं है।’ सिंह ने कहा कि अगर किसी का नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं है तो वह विदेशी न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग अनावश्यक रूप से डर का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह पूरी तरह से निष्पक्ष रिपोर्ट है। कोई भी गलत सूचना नहीं फैलानी चाहिए। यह एक मसौदा है ना कि अंतिम सूची।’ असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोगों को बधाई देते हुए कहा, ‘‘यह ऐतिहासिक दिन हमेशा लोगों की यादों में रहेगा।’   

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मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की प्रत्यक्ष देखरेख में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ भारत के महापंजीयक के सहयोग से आज अंतिम मसौदे के प्रकाशन की प्रक्रिया पूरी की गयी। उन्होंने कहा, ‘इस असाधारण काम के लिए मैं एनआरसी के अद्यतन की प्रक्रिया में शामिल 55,000 अधिकारियों और बराक तथा ब्रह्मपुत्र घाटियों, मैदानों और राज्य की पहाडिय़ों पर रहने वाले लोगों को हार्दिक बधाई देता हूं।’

मुख्यमंत्री ने लोगों से ‘साम्प्रदायिक और उकसावे’ वाली टिप्पणियां करने से बचने की भी अपील की। असम के साथ सीमा साझा करने वाले कई पूर्वोत्तर राज्यों ने अवैध प्रवासियों की संभावित घुसपैठ को विफल करने के लिए अपने- अपने पुलिस बलों को अलर्ट कर दिया है। केंद्र ने असम और उसके पड़ोसी राज्यों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 220 टुकडिय़ों को भेजा है।    

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