Tuesday, Jun 28, 2022
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number of animals and birds has started increasing in asola bhati wildlife

असोला भाटी वाइल्ड लाइफ में बढऩे लगी है पशुओं व पक्षियों की संख्या

  • Updated on 6/21/2022

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। किसी भी वन्यजीव को अपना गुजर बसर करने के लिए सिर्फ पेड़ों का झुरमुट रूपी जंगल नहीं बल्कि उपयुक्त वातावरण की जरूरत होती है। तभी उनकी संख्या में इजाफा हो पाता है। दिल्ली सरकार के वन विभाग व वन्यजीवों के संरक्षण में लगी संस्थाओं के निरंतर प्रयास से ही सूखी व कठोर कही जाने वाली अरावली पर्वत श्रृंख्ला में बसे असोला भाटी वाइल्ड लाइफ में दोबारा से वन्यजीवों की संख्या में इजाफा होने लगा है। सबसे अच्छी बात यह है कि कई ऐसे पशु लगातार दिखाई दे रहे हैं और उनकी संख्या बढ़ती जा रही है जो अमूमन इस क्षेत्र में काफी कम दिखाई देते हैं। 
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कंजरर्वेशन वर्क से असोला भाटी में बॉयोडायवर्सिटी पर पड़ा फर्क
बता दें कि इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह अरावली पर्वत श्रृंख्ला में बसे जल स्त्रोतों व नेटिव पेड़-पौधों का बढऩा है। लगातार वॉटर व सोईल कंजरर्वेशन पर किए जाने वाले काम के चलते असोला भाटी में बॉयोडायवर्सिटी पर फर्क पड़ा है। ऐसे में मानसून से पहले ही जंगल का रिजेनरेशन रेट बढ़ गया है और मानसून आने पर यह रेट अपने चरम पर होगा। खुशी की बात यह है कि हाल ही में वन विभाग के पैट्रोलिंग गार्ड्स को गोल्डन जैकल, रूडी मंगूश, चिकारा, इजिप्सन मर्सेन्री के साथ ही लगातार नीलगाय, हॉक डियर, लैपर्ड, लकड़बग्गा सहित कई प्रकार के पशु सिर्फ दिख ही नहीं रहे बल्कि उनकी संख्या लगातार बढ़ भी रही है। कई पशु विभाग द्वारा लगाए गए स्पाईकैम में कैप्चर भी हो चुके हैं, जिससे जंगल के संरक्षण में लगी टीम काफी उत्साहित है।
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दिल्ली में जुड़ी एक नई चिडिय़ा
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री साइंस के सोहेल मदान ने बताया कि अभी तक दिल्ली के पास 252 प्रजातियों की चिडिय़ां थीं लेकिन इस साल फरवरी में नॉर्दन गोशॉक यहां दिखाई दी और इससे दिल्ली में दिखने वाली चिडिय़ों की प्रजाति में इजाफा हुआ है। इसके अलावा गौरेया, बुलबुल, मैना, कौए, तोते सहित अन्य पक्षियों की संख्या भी बढ़ी है।
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पेड़ों व मृदा संरक्षण से पड़ा प्रभाव
मदान ने बताया कि विलायती कीकर और लैटिना जैसे पेड़-पौधों को हटाकर जोकि अरावली पर्वत श्रृंख्ला के नेटिव पौधे नहीं थे, उनकी जगह सलाई, कुल्लू, मोहिनी, वज्रदंती, करिल, कथारी व गंगेती को लगाया जा रहा है। इसके प्रभाव के चलते लगातार वन्यजीवों की संख्या बढ़ रही है। 

मानसून के आगमन पर कई प्रवासी पक्षियों ने बनाएं यहां घोसलें
असोला में मानसून से पहले ही कई सेंट्रल इंडिया में रहने वाले प्रवासी पक्षियों ने अपना डेरा जमाकर घोसलें बना लिए हैं। जिसमें खासकर इंडियन पैराडाइज, कुक्कू, इंडियन कुक्कू हैं। इसकी वजह है कि जब वो बारिश होगी तो कीड़ों की संख्या बढ़ेगी और उन्हें व उनके बच्चों को खाने को भरपूर कीड़े मिलेंगे।

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