Thursday, Feb 27, 2020
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अफसरों ने छीन ली 30 संविदाकर्मियों की नौकरी, कार्मचारियों ने लगाई न्याय की गुहार

  • Updated on 2/10/2020

देहरादून/ब्यूरो। अपनी मनमानी के लिए मशहूर उत्तराखण्ड (Uttarakhand) के नौकरशाह अब तानाशाही पर उतर आए हैं। यहां तक कि शासन के कुछ अफसर खुद को राज्य मंत्रिमण्डल से भी ऊपर मानने लगे हैं। इसका ताजा उदाहरण आपदा प्रबंधन विभाग में देखने को मिला है। कैबिनेट के निर्णय को ताक पर रखते हुए अफसरों ने 30 संविदा कर्मचारियों से उनकी नौकरी छीन ली। न्याय की गुहार लगा रहे इन कार्मचारियों की कोई सुनने को तैयार नहीं है।

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आपदाओं को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग का गठन किया था
राज्य सरकार ने वर्ष 2001 में आपदाओं को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग का गठन किया था। आपदा न्यूनीकरण और बचाव व राहत के लिए ‘आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र’ (डीएमएमसी) की स्थापना की गई। इसके बाद 2017 में अलग से ‘राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ (यूएसडीएमए) का भी गठन किया गया।

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डीएमएमसी के सभी कार्मिकों को यूएसडीएमए में समाहित करने का दिया निर्देश
अब त्रिवेन्द्र सरकार ने निर्णय लिया है कि डीएमएमसी का यूएसडीएमए में विलय करके इस संस्थान को और अधिक सक्रिय और उपयोगी बनाया जाए। फैसला लेते वक्त इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि डीएमएमसी के सभी कार्मिकों को यूएसडीएमए में, जो जिस स्थिति में है उसी में समाहित कर लिया जाएगा।

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30 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया
लेकिन बीते 13 नवम्बर को जब कैबिनेट में इससे सम्बंधित प्रस्ताव रखा गया, तो अधिकारियों ने विलय के लिए 60 में से सिर्फ 30 कर्मचारियों का ही जिक्र इसमें किया और उन्हें यूएसडीएमए में समाहित करने की अनुमति ले ली। यानि सरकार के फैसले के विरुद्ध सिर्फ आधे कर्मचारियों का ही यूएसडीएमए में विलय किया गया। शेष 30 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

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संविदा कर्मी आउट आउटसोर्स कर्मी इन
हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों ने विलय के प्रस्ताव में संविदा कर्मियों को तो बाहर कर दिया, जबकि 24 आउटसोर्स कर्मियों को समाहित कर लिया। नियमानुसार संविदा कर्मियों की नौकरी पर पहला हक होता है, क्योंकि उनकी नियुक्ति सीधे विभाग करता है।

 

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