Monday, Nov 29, 2021
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वायुसेना दिवस पर वायुसेना प्रमुख का बाहरी ताकतों को कड़ा संदेश, सीमाओं की ओर ना देंखे, हम हमेशा तैया

  • Updated on 10/8/2021

नई दिल्ली/टीम डिजीटल।  भारतीय वायुसेना के 89 वें स्थापना दिवस पर शुक्रवार को गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस पर एकबार फिर भारतीय वायुसेना के जांबाजों का अदम्य साहस व शौर्य देखने को मिला और साथ ही वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने अपने संबोधन से बाहरी ताकतों को भी कड़ा संदेश दे दिया कि भारतीय वायुसेना अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से चौकन्नी और तैयार है। इस दौरान कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए नौसेना प्रमुख एडमिरल कर्मवीर सिंह, थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे व चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल विपिन रावत भी पहुंचे। इस बार वायुसेना दिवस की थीम आत्मनिर्भर व सक्षम थी। आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के मौके पर समारोह में अपने हैरतअंगेज करतबों से हैरान कर देने वाले वायुसेना के विमानों की संख्या भी 75 ही थी। इस दौरान परेड़ स्थल पर मौजूद 1 हजार किलों का खादी का तिंरगा भी चर्चा का विषय रहा। जिसकी लंबाई 225 फिट व चौडाई 150 फिट थी। 

वायुसेना प्रमुख ने कहा  सीमाओं की ओर देखने वाले सावधान हो जाओ
अपने संबोधन में वायु सेना प्रमुख ने बाहरी ताकतों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि देश की सीमाओं की ओर देखने वाली बाहरी ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देने में वायुसेना हर तरह से सक्षम है। चुनौतियां बेशक लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन वायुसेना भी इनसे निपटने के लिए तैयार है। इसलिए सीमाओं पर गड़बड़ी फैलाने वाले सावधान हो जाएं क्योंकि उनसे हर तरह से निपटा जाएगा। युवाओं का अपने संबोधन में जिक्र करते हुए वायु सेना प्रमुख ने वायु सेना में शामिल होकर देश की रक्षा करने का जज्बा रखने वाले युवाओं को बधाई दी। साथ ही उन्होंने मेक इन इंडिया का भी जिक्र करते हुए कहा कि स्वदेशी को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे देश और सेना दोनों मजबूत और सुदृढ़ हो रहे हैं।  

जांबाजों ने दिखाया अदम्य साहस व शौर्य 
वायुसेना दिवस समारोह में एक बार फिर भारतीय वायुसेना के जवानों का साहस व शौर्य देखने को मिला। जिसकी शुरूआत पहली बार समारोह में प्रदर्शित हो रहे पॉवर हैंडग्लैंडर व पैरा मोटर के करतबों से हुई। इसके बाद आकाश गंगा टीम के जवानों ने 8 हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाकर अपनी क्षमता और साहस का परिचय दिया। 1971 की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले डैकौटा विमान से पैरा जम्पर्स ने 6 हजार फिट से छंलाग लगाई और अपने करतबों से वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। इस दौरान आयोजित परेड में सैनिकों का कदमताल और अनुशासन, देशभक्ति व समर्पण की भावना को उच्चतम स्तर पर ले गए। वायुसेना प्रमुख ने अपने जज्बे, साहस और सेवा से छाप छोडऩे वाले जवानों को वायुसेना मेडल गैलेंट्री, वायुसेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल व प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। 

मैदान में उतरे पुराने साथी 
आयोजन के दौरान जहां एक ओर तेजस व राफेल जैसे विमान अपनी तेजी से सभी को हैरान कर रहे थे। वहीं दूसरी और भारतीय वायुसेना के पुराने साथी यानि पिछली पीढी के विमानों ने अपने कारनामों से सभी को अचंभित कर दिया। प्रदर्शनी में शामिल एईडब्ल्यू एंड सी तकनीक से लैस वह विमान खडा था जिस सिस्टम का इस्तेमाल 1965 की जंग में भारतीय वायुसेना ने सफलतापूर्वक किया था। इसके अलावा टाइगर मोथ व डकोटा विमानों ने भी जमकर कलाबाजियां दिखाईं और खूूब तालियां बटोरीं। 

दुनिया ने सुनी आधुनिक भारत की दहाड़
तेजस, मिग, सुखोई, मिराज, जैगुआर और राफेल जैसे फाइटर जैट्स के अलावा चिनूक, अपाचे और एलएच मार्क-3 जैसे उन्नत हैलीकॉप्टरों ने आसमान में इस तरह अपने जौहर दिखाए कि पूरी दुनिया ने आधुनिक भारत की दहाड़ सुनी। खासतौर पर राफेल ने अपनी ओर लोगों का ध्यान खूब खींचा। ध्वनि की गति से भी तेज उड़ते विमान पलभर में आसमान में यूं गायब हो जाते कि लोग हैरत में रह जाते। करीब 50 मिनट के एयरशो में कई बार ऐसे मौके आए जब लोग अपने दातों तले ऊंगली दबाने को मजबूर हो गए। इन तमाम जंगी जहाजों के साथ आकाश गंगा एयरोबैटिक टीम ने भी कदमताल किया। जंगी जहाजों के एक-से बढकर एक करतबों के साथ ही 89 वें वायुसेना दिवस का समापन भी हो गया। 
 

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