Tuesday, Oct 04, 2022
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on hijab controversy, madras high court asked what is paramount – nation or religion

हिजाब विवाद पर मद्रास हाई कोर्ट ने पूछा क्या सर्वोपरि है- राष्ट्र या धर्म

  • Updated on 2/11/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मद्रास उच्च न्यायालय ने देश में कुछ ताकतों द्वारा धार्मिक असौहार्द्र पैदा करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर वीरवार को गंभीर चिंता प्रकट की और हैरानी जताते हुए कहा कि क्या सर्वोपरि है-‘राष्ट्र या धर्म।’ कर्नाटक में हिजाब से जुड़े विवाद को लेकर छिड़ी बहस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एम.एन. भंडारी और न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती की प्रथम पीठ ने कहा कि कुछ ताकतों ने ‘ड्रेस कोड’ को लेकर विवाद उत्पन्न किया है और यह पूरे भारत में फैल रहा है।

उधर, हिजाब मामले की सुनवाई कर रहे कर्नाटक उच्च न्यायालय ने छात्रों से कहा कि जब तक मामला सुलझ नहीं जाता तब तक वे शैक्षणिक संस्थानों के परिसर में ऐसा कोई वस्त्र पहनने पर जोर नहीं दें जिससे लोगों को उकसाया जा सके।

कुछ जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट की पीठ ने कहा, ‘यह सचमुच में स्तब्ध करने वाला है, कोई व्यक्ति हिजाब के पक्ष में है, कुछ अन्य टोपी के पक्ष में हैं और कुछ अन्य दूसरी चीजों के पक्ष में हैं। यह एक देश है या यह धर्म या इस तरह की कुछ चीज के आधार पर बंटा हुआ है। यह आश्चर्य की बात है।’

न्यायमूर्ति भंडारी ने भारत के पंथनिरपेक्ष देश होने का जिक्र करते हुए कहा, ‘मौजूदा विवाद से कुछ नहीं मिलने जा रहा है लेकिन धर्म के नाम पर देश को बांटने की कोशिश की जा रही है।’

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई सोमवार के लिए निर्धारित करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थान छात्र-छात्राओं के लिए कक्षाएं फिर से शुरू कर सकते हैं। बुधवार को गठित मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी, न्यायमूॢत जे.एम. काजी और न्यायमूर्ति कृष्णा एस. दीक्षित की तीन सदस्यीय पीठ ने यह भी कहा कि वह चाहती है कि मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जाए लेकिन उस समय तक शांति और सद्भावना बनाए रखनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘मामले के निपटारे तक आप लोगों को इन सभी धार्मिक चीजों को पहनने की जिद नहीं करनी चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘हम आदेश पारित करेंगे। स्कूल- कॉलेज शुरू होने दें। लेकिन जब तक मामला सुलझ नहीं जाता तब तक किसी भी छात्र- छात्राओं को धार्मिक पोशाक पहनने पर जोर नहीं देना चाहिए।

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