Wednesday, Mar 22, 2023
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उत्तराखंड में बंजर हो चुकी एक लाख हेक्टेयर कृषि भूमि, कैसे दोगुनी होगी किसानों की कमाई

  • Updated on 7/16/2018

देहरादून/ब्यूरो। किसानों की आय 2022 तक क्या दोगुनी हो पाएगी? यह सवाल बार-बार पूछा जा रहा है। फिलहाल तो उत्तराखंड के किसानों की दशा बद से बदतर होती जा रही है। खेती लाभ का सौदा नहीं रही। इसलिए, किसान खेती को अलविदा कह रहे हैं। उत्तराखंड की विभिन सरकारी एजेंसियों के आंकड़ों और तथ्यों पर नजर डालें, तो हालात बेहद खराब दिख रहे हैं। 
उत्तराखंड में 2017-18 में राज्य सकल घरेलू उत्पाद (एसजीडीपी) में खेतीबाड़ी का योगदान 9.92 फीसदी से कुछ ही ज्यादा था। जबकि, प्रदेश की 45 फीसदी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। यह भी तथ्य है कि राज्य में सात लाख हेक्टेयर यानी सिर्फ 12 फीसदी जमीन पर खेती होती है। 65 फीसदी भूभाग वनों से घिरा है।

चिंताजनक बात यह है कि राज्य निर्माण  से लेकर अब तक एक लाख हेक्टेयर जमीन बंजर हो चुकी है। कुल किसानों में नब्बे फीसदी से भी अधिक छोटे व सीमांत किसान हैं। इनके पास वित्तीय संसाधनों की भारी कमी है। हाल ही में हुए अध्ययन से यह भी साफ हो गया है कि पहाड़ी जिलों में मिट्टी की उर्वरता लगातार कम हो रही है।

इस कारण पहाड़ी इलाकों में उत्पादन व उत्पादकता पर विपरीत असर पड़ रहा है। यहां इकोनॉमिक्स ऑफ स्केल है ही नहीं। उत्पादन बेहद सीमित होता है और यह बाजार उन्मुख ही नहीं है। कुल फसल उत्पादन में गेहूं की हिस्सेदारी 32 फीसदी और धान की 22 फीसदी है। इनके अलावा गन्ना, मक्का, दाल-दलहन, आम, लीची, अमरूद, सेब, आलू, टमाटर, बींस, मटर, पत्ता गोभी और शिमला मिर्च है। लेकिन अस्सी फीसदी किसान सिर्फ अपने लिए उत्पादन करते हैं। इससे उनकी आय नहीं बढ़ पाती है। इसके साथ ही पर्वतीय इलाकों में पूंजी निर्माण की प्रक्रिया बेहद धीमी है।

नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक एसी श्रीवास्तव कहते हैं कि उत्तराखंड में ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों व कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) के माध्यम से ऋण प्रवाह हो रहा है। प्रदेश में सात सौ सत्तर पैक्स व सहकारी बैंकों की 285 शाखाएं व ग्रामीण बैंकों की 287 शाखाएं हैं। वह कहते हैं कि खेती के स्वरूप में आमूलचूल बदलाव की दरकार है। किसानों को हाईवैल्यू फसल उगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

इसके लिए कई कड़े फैसले लेने पड़ेंगे। इनमें भूमि बंदोबस्त भी एक है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में हमारी तरफ से प्रदेश को दो हजार करोड़ रुपये प्रदेश सरकार को प्रदान किया गया है। इससे किसानों को लाभ हो रहा है। 

नाबार्ड के जनसंपर्क अधिकारी सुनील पांडे कहते हैं कि नाबार्ड कई स्तरों पर काम कर रहा है। चार हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। तीन हजार के आसपास एसएचजी को बैंकों से लिंक किया गया है। एक हजार से अधिक ज्वाइंट लायबिल्टी ग्रुपों का बैंक लिंकेज किया गया है। सौ से अधिक किसान क्लब बनाए गए हैं। पांच जलागम परियोजनाएं व चार हजार से अधिक गांवों में जल अभियान चलाया जा रहा है।

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