Tuesday, Dec 07, 2021
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महिलाओं के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक ‘पापुआ न्यू गिनी’

  • Updated on 10/20/2018

आज विश्व भर में हिंसा और अपराधों की एक लहर सी चली हुई है और विशेष रूप से महिलाएं पारिवारिक एवं सामाजिक हिंसा का बुरी तरह शिकार हो रही हैं। इसी शृंखला में महिलाओं पर अत्याचारों के मामले में ‘पापुआ न्यू गिनी’ नामक देश तो सारी सीमाएं पार करता लगता है। 

‘पापुआ न्यू गिनी’ आस्ट्रेलिया के उत्तर में स्थित एक छोटा सा देश है जो 16 सितम्बर, 1975 को आजाद हुआ। इसकी आबादी 2009 की जनगणना के अनुसार 67,32,000 थी। मात्र 4,62,840 वर्ग किलोमीटर में फैला यह देश विविधताओं के देश के रूप में जाना जाता है।

यह रहने के लिए विश्व के सबसे घटिया देशों की सूची में शामिल है। यहां लगभग 850 भाषाएं बोली जाती हैं और कई धार्मिक समुदाय यहां रहते हैं। यह पितृ प्रधान देश महिलाओं के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक है। कुछ अनुमानों के अनुसार यहां 70 प्रतिशत महिलाओं का बलात्कार होता है या उन्हें यौन हिंसा का शिकार होना पड़ता है। 

हाल ही में बी.बी.सी. के संवाददाता बैंजामिन जैंड ने ‘पापुआ न्यू गिनी’ की राजधानी ‘पोर्ट मोरेस्बी’ का दौरा किया और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को सही मानने वाले कुछ लोगों से भेंट की। इस यात्रा में बैंजामिन जैंड की भेंट कुछ ऐसी महिलाओं से भी हुई जो कहती हैं कि अब बहुत हो चुका। 

यहां घरेलू हिंसा और बलात्कार की दर बहुत अधिक है और सबसे बुरी बात यह है कि बलात्कार के गिने-चुने आरोपियों को ही सजा मिल पाती है। इस वर्ष जनवरी से मई के बीच घरेलू हिंसा और बलात्कार के कम से कम 6,000 मामले दर्ज किए गए हैं जबकि अनेक मामले ऐसे भी होंगे जो दर्ज ही नहीं किए गए होंगे।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार इसका कारण यह है कि ‘पापुआ न्यू गिनी’ के लोग इसे एक आम बात ही समझते हैं। कोई महिला जो गर्लफ्रैंड, पत्नी या दोस्त है, उसके साथ ङ्क्षहसा होना यहां आम है। 

यहां स्थानीय बदमाशों को ‘रास्कल’ कहा जाता है जिनके लिए किसी महिला का गैंग रेप करना रोजमर्रा की आम गतिविधियों में शामिल है। इस बारे में यह लोग खुल कर बात भी करते हैं और उन्हें पुलिस तथा कैमरे का भी कोई डर नहीं। 

एक रास्कल के अनुसार, ‘‘यहां महिलाएं सबसे आसान शिकार हैं। उन्हें लूटना और पीटना सबसे आसान होता है। सड़क पर यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को पीट रहा हो तो कोई उसका विरोध नहीं करता।’’

बदमाशों को मिली हुई इसी ‘छूट’ के कारण यहां की महिलाएं सदा भय की छाया में रहती हैं। राजधानी ‘पोर्ट मोरेस्बी’ में महिलाओं को ङ्क्षहसा से बचाने के लिए सरकार ने ‘सेफ हाऊस’ बनाए हुए हैं।

एक ‘सेफ हाऊस’ में दो महीने से अपने बच्चों के साथ रहने वाली ‘सुजैन’ नामक महिला के अनुसार उसका विवाह 2000 में हुआ था और 18 साल तक घरेलू हिंसा झेलने के बाद उसकी हिम्मत ने जवाब दे दिया। 

‘सुजैन’ के अनुसार, ‘‘वह मुझे बहुत पीटता था। उसने इसी साल फरसे से मेरा हाथ चीर दिया था तथा मुझे अपनी हथेली पर 35 टांके लगवाने पड़े। जब वह मुझे पीटता रहा तो डर के मारे मुझे मकान की दूसरी मंजिल से कूदना पड़ा जिससे मेरा दाहिना पैर टूट गया। मेरा पति मुझे अपनी सम्पत्ति समझता था और उसके घर वाले उसे रोक नहीं पाते।’’

‘मैरिसा’ नामक एक अन्य महिला जिसे अधिक उम्र होने के कारण सेफ हाऊस में दाखिला नहीं मिल सका, ने बताया कि, ‘‘मेरा दामाद मुझे बैल्ट से पीटता है। वह मेरे साथ सैक्स करना चाहता है पर मैं ऐसा नहीं होने दे सकती। मुझे घर लौटने में डर लग रहा है। वह चाकू रखता है और मेरी बेटी को भी बहुत पीटता है। मेरे दामाद ने अपनी दो बेटियों का भी रेप किया है परंतु उनके परिवार को पुलिस से कोई मदद नहीं मिली।’’

मात्र 5 साल पहले ही ‘पापुआ न्यू गिनी’ में फैमिली प्रोटैक्शन एक्ट बनाया गया है जिसके अनुसार घरेलू ङ्क्षहसा एक अपराध है और इसके लिए 2 साल जेल की सजा या आरोपी को 2000 अमरीकी डालर जुर्माना हो सकता है। 

इस कानून से महिलाओं के हौसले बढ़े हैं परंतु इसके बावजूद वहां महिलाओं पर हिंसा का जारी रहना इस देश की शासन व्यवस्था पर एक धब्बा है और यह कलंक धुलने में न जाने कितना समय और लगेगा। 

यहां मन में एक प्रश्र उठता है कि भारत में महिलाओं पर हिंसा रोकने सम्बन्धी दर्जनों कानून होने के बावजूद रोज महिलाओं के विरुद्ध अपराध हो रहे हैं तो फिर भारत और ‘पापुआ न्यू गिनी’ में फर्क ही क्या है!             —विजय कुमार

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