Monday, Jan 21, 2019

जीएसटी फर्जीवाड़े में एक व्यक्ति गिरफ्तार, चोरी का आंकड़ा 150 करोड़ तक पहुंचने का संदेह

  • Updated on 1/8/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। अंतरप्रांतीय जी.एस.टी. फर्जीवाड़े में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सी.जी.एस.टी.) विभाग के एक आला अधिकारी ने कहा कि इस मामले में करीब 150 करोड़ रुपए की कर चोरी का संदेह है। जी.एस.टी. प्रणाली लागू होने के डेढ़ साल बाद सामने आई इस धांधली को मध्य प्रदेश समेत 5 राज्यों में पंजीकृत लगभग 400 फर्जी फर्मों के जरिए अंजाम दिया गया। 

सी.जी.एस.टी. की इंदौर इकाई के आयुक्त नीरव कुमार मल्लिक ने बताया कि मामले में सी.जी.एस.टी. एक्ट के तहत 5 जनवरी को गिरफ्तार जगदीश धीरजलाल कनानी से लगातार पूछताछ की जा रही है। मुम्बई का रहने वाला यह शख्स एक स्थानीय अदालत के आदेश पर 8 जनवरी तक सी.जी.एस.टी. की हिरासत में है। मल्लिक ने बताया कि इस मामले में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में फर्जी दस्तावेजों के बूते पंजीकृत कराए गए करीब 400 फर्मों का कागजी कारोबार हमारी जांच के घेरे में है।

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उन्होंने बताया कि खुद कनानी के मोबाइल नंबर और उसके ई-मेल आई.डी. के इस्तेमाल से करीब 15 फर्जी फर्मों का जी.एस.टी. पंजीकरण कराया गया है। हालांकि, इन फर्मों को पंजीकृत कराते समय अन्य लोगों को धन का लालच देकर उनकी पहचान और पते के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।  मलिक ने बताया कि जी.एस.टी. चोरी के मकसद से कुछ समय तक चलाए जाने के बाद इनमें से अधिकांश फर्मे बंद कर दी गईं। 

सी.जी.एस.टी. आयुक्त के मुताबिक इन फर्मों की आड़ में बोगस कारोबार, जाली इनवॉयस और फर्जी ई-वे बिलों के आधार पर न केवल जी.एस.टी. की चोरी की जा रही थी, बल्कि सरकारी खजाने से जी.एस.टी. का इनपुट टैक्स क्रैडिट हासिल करने की कोशिश भी की जा रही थी।  उन्होंने बताया कि धातुओं के कबाड़ और अन्य वस्तुओं के कारोबार के नाम पर करीब छह महीने से चल रहे इस फर्जीवाड़े में कनानी के साथ कुछ कर सलाहकार समेत कम से कम पांच लोग शामिल हो सकते हैं। अन्य आरोपियों की पहचान की कोशिश की जा रही है।

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