Tuesday, Aug 21, 2018

योगी सरकार का रिपोर्ट कार्ड, आखिर जनता की उम्मीदों पर कितने खरे उतरे CM

  • Updated on 3/19/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। किसी भी सरकार की उपल्ब्धियों का फैसला उसके कामकाज से किया जाता है।  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी बीजेपी सरकार के कार्यकाल को एक साल पूरा हो गया है।। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ दो उपमपख्यमंत्री और उनके 22 कैबिनेट मंत्री, 13 राज्यमंत्री, 9 राज्यमंत्री (जिनके पास स्वतंत्र प्रभार है) ये सभी लोग मिलकर उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने में पिछले एक साल से लगे हुए है। अब सरकार की पिछले एक साल की कोशिशों का आकलन करना जायज है कि आखिर उनकी कितनी कोशिश रंग लाई। अब सरकार का एक साल का रिपोर्ट कार्ड बताएगा कि आखिर सरकार जनता की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरी। 

शुरूआती कुछ महीनों में तो योगी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए जिन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी। फिर चाहें वो अवैध बूचड़खानों पर लगाम लगाना हो या फिर एंटी रोमियो स्कवेड सरकार के इन फैसलों  ने आते ही प्रदेश की जनता से लेकर पूरा का पूरा सिस्टम हिल गया था। होता भी क्यो नहीं योगी जी जो आ गए थे प्रदेश में। अब योगी जी आए और प्रदेश की पुलिस व्यवस्था ना बदले भला ऐसा हो सकता है। 

योगी और पुलिस व्यवस्था 

योगी सरकार ने पुलिस को फिल्मी ताकत दे दी मत्लब जैसे आपने फिल्मों में देखा होगा पुलिस किसी अपराधी को पकड़ती है फिर उसे भागने के लिए बोलती और उसे गोली मार देती है। 15 फरवरी को ही योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बताया था कि उनके कार्यकाल में कुल 1,200 मुठभेड़ हुई जिनमें से 40 अपराधियों को मार दिया गया। चलिए ये एक सराहनीय कदम है क्योंकि प्रदेश में दिन प्रतिदिन अपराध बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन अगर गौर किया जाए तो एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2000-2017 के बीच एनएचआरसी ने देशभर में 1,782 फर्जी मुठभेड़ के मामले दर्ज किए थे। इनमें से 44.55 फीसदी यूपी के ही थे। 

अपराधियों में पुलिस को लेकर इतना खौफ है कि 10 महीने में करीब 5500 अपराधियों ने अपनी जमानत रद्द करा दी है। इस बात का खुलासा डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने किया था।    2017 से लेकर जनवरी 2018 के बीच 10 महीने में यूपी पुलिस ने करीब 1331 एनकाउंटर किए हैं। इसमें  3091 वांछित अपराधी गिरफ्तार भी किए गए है। साथ ही 43 को मार गिराया गया है। इसमें से ज्यादातर अपराधी इनामी थे।  

योगी सरकार के बजट का पिटारा

 उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कृषि, ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास, रोजगार एवं आजीविका पर विशेष जोर देते हुए राज्य का 2018-19 के लिए कुल 4,28, 384. 52 करोड़ रुपए के व्यय का बजट पेश किया। पिछले वित्त वर्ष के बजट के सापेक्ष यह राशि 11.4 प्रतिशत अधिक है।  राज्य के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल की ओर से पेश बजट में 14, 341. 89 करोड़ रुपए की नई योजनायें शामिल की गई।

किसानों को कम ब्याज दर पर फसली ऋण उपलब्ध कराने हेतु सब्सिडी योजना के तहत 200 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है, तो उर्वरकों के अग्रिम भण्डारण की योजना हेतु 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य तथा रोग नियंत्रण कार्यक्रम हेतु 100 करोड़ रुपए की व्यवस्था बजट में है। वर्ष 2018-19 के दौरान रबी खरीद सत्र में 50 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय किया गया है।  स्मार्ट सिटी मिशन के लिए 1650 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के लिए वर्ष 2018-19 में 5, 000 करोड़ रुपए और शहरी क्षेत्र के लिए 1100 करोड़ रुपए का प्रावधान है। 

योगी सरकार और शिक्षा 

योगी सरकार के राज में करीब एक साल में करीब 66.37 लाख छात्रों ने 10 वी और 12 वीं की परीक्षा दे रहे है। सरकार ने फैसला लिया की इस बार से नकल नहीं होने देंगे इसलिए सरकार ने कई सख्त कदम उठाए। सरकार की कोशिश है कि शिक्षा माफिया पर नकेल कसी जाए। हमारे देश में मुफ्त शिक्षा का मतलब है कि स्कूल फीस माफ करना हालांकि लोग ये भूल जाते है कि स्कूल ड्रेस खाना और हॉस्टल की भी व्यवस्था देखनी होती है। गरीब रेखा से नीचें आने वाले लोगों के लिए तो यह सुविधा मिली ही चाहिए। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री 12 वीं तक मुफ्त शिक्षा पॉलिसी की घोषणा करने जा रहे है। जिससे सभी समुदाय के लोगों को फायदा होगा।    
 

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