only fools can ignore the warning of recession former rbi governor raghuram rajan

मंदी की चेतावनी को मूर्ख ही नजरअंदाज कर सकते हैं-  पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन

  • Updated on 8/22/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश की अर्थव्यवस्था की बिगड़ रही हालत और जीडीपी के आंकड़ों की गणना के तरीके पर विचार करने के सुझाव के 2 दिन बाद ही आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को एक बार फिर अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। 

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रघुराम राजन ने ट्विटर पर लिखा कि क्या यह तूफान से पहले की  शांति है। अर्थव्यवस्था में मंदी है, ऑटो सैक्टर में स्लो डाऊन है। नौकरियों के मौके नहीं बन रहे। सबसे अहम बात है कि देश के बैंकर असामान्य हालात से गुजर रहे हैं। ये तमाम संकेत एक तरह की चेतावनी की तरह हैं और कोई मूर्ख ही इन संकेतों को नजरअंदाज कर सकता है। बैंकों के साथ की गई रिव्यू मीटिंग में कोई नतीजा नहीं निकला है और बैंक अपने मुख्य मुद्दों को नजरअंदाज कर रहे हैं। बैंकों के स्टाफ की समस्या की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। बैंकों के आधारभूत ढांचे को लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही। बैंक कर्मियों को मिलने वाले वेजिज को लेकर चल रही बातचीत की गति काफी धीमी है। 

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इस मामले में बैंकों की 29 अगस्त को मीटिंग रखी गई है पर बैंकर निराश हैं क्योंकि उनकी मांगें नजरअंदाज की गई हैं। कल्पना कीजिए ये वही लोग है जिन्होंने नोटबंदी के दौरान और अन्य सामाजिक योजनाओं के लिए काम किया लेकिन इसके बावजूद बैंक कर्मियों को उम्मीद के मुताबिक हाइक नहीं मिली। बैंक कर्मियों की यूनियनों ने पहले से ही तैयारी की हुई है और अब सब कुछ वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय पर निर्भर है। यदि सरकार को 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी का लक्ष्य हासिल करना है तो इस दिशा में जल्द फैसले करने होंगे। 

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इससे पहले रविवार को निजी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में राजन ने कहा था कि सरकार को नौकरियां पैदा करने के लिए निजी निवेशकों को प्रोत्साहित करना होगा। इसके साथ ही उन्होंने ग्रॉस डोमैस्टिक प्रोडक्शन (जी.डी.पी.) की गणना के तरीके पर भी सवाल उठाए थे। 

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जीडीपी वृद्धि घटकर 5.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान:  नोमुरा
सेवा क्षेत्र में सुस्ती, कम निवेश और खपत में गिरावट के बीच देश की आॢथक वृद्धि इस साल जून तिमाही में 5.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में उक्त बात कही। नोमुरा के मुताबिक दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में सुस्ती के बावजूद जुलाई-सितम्बर तिमाही में अर्थव्यवस्था में कुछ सुधार आने की उम्मीद है। कंपनी ने अपने शोध नोट में कहा, ‘‘उच्च आवृत्ति कारकों में नरमी बरकरार रहेगी। इसमें सेवा क्षेत्र का खराब प्रदर्शन, निवेश में कमी, बाहरी क्षेत्र में सुस्ती और खपत में भारी गिरावट शामिल हैं। वित्त वर्ष 2018-19 में अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त होकर 6.8 प्रतिशत पर आ गई। यह 2014-15 के बाद का निम्न स्तर है।’’

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टैम्परेरी है आॢथक सुस्ती, मार्च तक दूर हो जाएगी : सुंदरम एमएफ
वैश्विक सुस्ती के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से तरक्की कर रही है। भारतीय बाजार का यह आकर्षण विदेशी निवेशकों को जल्द वापस ले आएगा। यह बात सुंदरम एमएफ के सीआईओ एस कृष्णकुमार ने एक इंटरव्यू में कही है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि बाजार में कमजोरी ज्यादा समय तक रहेगी यह टैम्परेरी है जो मार्च तक दूर हो जाएगी क्योंकि मार्कीट का वैल्यूएशन फिर से कंफर्टेबल लैवल पर आ गया है।  

निफ्टी की अगले 12 महीने की अनुमानित डिवीडैंड यील्ड और 10 साल के सरकारी बांड्स की यील्ड का अंतर घटकर शून्य के पास आ गया है।  उन्होंने कहा कि वैश्विक सुस्ती के बीच तेजी से तरक्की कर रही अर्थव्यवस्था के तौर पर भारत की लांग टर्म स्टोरी जारी रहेगी, इसलिए विदेशी निवेशक जल्द लौटेंगे। कम्पनियों में विदेशी निवेश की ऊपरी सीमा को सैक्टर के बराबर करने का सरकार का फैसला दूसरा सकारात्मक कदम है।  

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