Monday, Oct 03, 2022
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Corona से पीड़ित दुनिया के लिये करुणा ही उम्मीद, दूसरों के दुःख दर्द में हो शामिलः कैलाश सत्यार्थी

  • Updated on 2/13/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Corona Virus) ने लोगों के जीवन को कैसे बदल कर रख दिया,इस पर नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी के हालिया पुस्तक में विस्तार से बिंदुवार रखा गया है। कैलाश सत्यार्थी की पुस्तक ‘कोविड-19 सभ्‍यता का संकट और समाधान पर आज एक वर्चुअल परिचर्चा का आयोजन हुआ। यह आयोजन  इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय कला केंद्र ने की। इस अवसर पर  इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय कला केंद्र के अध्‍यक्ष रामबहादुर राय ने कहा कि सत्य के खोजी कैलाश सत्यार्थी के पुस्तक में विचार की अमीरी छिपा हुआ है। जिसको समझने की जरुरत है।

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उन्होंने कहा कि कैलाश के इस पुस्तक से नई सभ्यता का शास्त्र रचा जा सकता है। वहीं कैलाश सत्‍यार्थी ने अपने संबोधन में कहा कि करुणा में गतिशीलता छिपी हुई है। यह ऐसी अग्नि है जो हम सबको बेहतर बनाती है। एक-दूसरे के प्रति जुड़ाव भी महसूस करते है। उन्होंने कहा कि हम सबको दूसरे के दुःख,दर्द को अपनी परेशानी समझनी चाहिये। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को हराने के लिये करुणा चाहिये। करुणा का वैश्वीकरण समय की मांग है।

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वहीं इस वर्चुअल आयोजन को डॉ सच्चिदानंद जोशी ने भी संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कैलाश सत्यार्थी बाल मजदूरों के अधिकारों के लिये एक लंबी लड़ाई लड़े है। उन्होंने एक चेतना जगाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि असल में कोरोना से उपजा संकट एक सभ्यता का संकट ही तो है। जिसको कैलाश ने विस्तार से अपने पुस्तक में रखा है। दूसरी तरफ इस आयोजन को  राज्‍यसभा सांसद श्रीमती सोनल मानसिंह, प्रसून जोशी,पूर्व राजनयिक डॉ पवन के वर्मा,सुधाशु त्रिवेदी ने भी संबोधित किया।

    

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