Friday, Aug 19, 2022
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विपक्ष की मोदी सरकार से MSP पर कानून बनाने, महंगाई, पेगासस पर चर्चा कराने की मांग

  • Updated on 11/28/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने सरकार से किसानों के उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी को लेकर तत्काल कानून बनाने के संबंध में कदम उठाने की मांग की।  सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में करीब 30 दलों ने हिस्सा लिया । इसमें विपक्षी दलों ने पेगासस जासूसी विवाद, महंगाई, कृषि कानूनों, बेरोजगारी, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ तनाव सहित कुछ अन्य मुद्दों को उठाया और चर्चा कराने की मांग की । विपक्षी दलों ने सरकार को रचनात्मक मुद्दों पर सकारात्मक सहयोग देने का आश्वासन दिया। 

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बैठक के बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ सर्वदलीय बैठक में 15-20 महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सभी दलों ने मांग की कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने पर सरकार तुरंत ध्यान दे।’’ उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को मुआवजा देने का विषय, महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का मुद्दा भी बैठक में उठा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बिजली संशोधन विधेयक पर भी सरकार से ध्यान देने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनसे कहा कि कुछ विधेयकों को पेश करने के बाद वह उसे संसद की स्थायी समिति को भेजना चाहती है और इस बारे में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में कल तय हो जायेगा। 

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खडग़े ने कहा, ‘‘ हम सरकार को सहयोग करना चाहते हैं। अच्छे विधेयक आयेंगे तब हम सरकार को सहयोग करेंगे । अगर हमारी बात नहीं मानी (चर्चा को लेकर) गई, तब सदन में व्यवधान की जिम्मेदारी सरकार की होगी । ’’ कांग्रेस नेता खडग़े ने कहा कि बैठक में कोविड-19 की तीसरी लहर की आशंका के बारे में भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा, ‘‘ हमने सरकार से मांग की है कि कोविड महामारी के कारण जान गंवाने वालों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को भी मुआवजा दिया जाए।’’ खडग़े ने कहा, ‘‘हम अपेक्षा कर रहे थे कि बैठक में प्रधानमंत्री आएंगे, लेकिन किसी कारण से वह नहीं आए।’’  उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रधानमंत्री से कृषि कानूनों को लेकर कुछ बातों पर स्थिति स्पष्ट करना चाहते थे।’’  

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खडग़े ने कहा कि प्रधानमंत्री ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की और माफी मांगते हुए कहा कि वे किसानों को समझा नहीं पाये।  कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इसका अर्थ यह है कि कल किसी दूसरे रूप में इन कानूनों को लाया जायेगा, हम इस पर स्थिति स्पष्ट करना चाहते थे।’’ विपक्षी नेताओं ने पश्चिम बंगाल सहित कुछ राज्यों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र बढ़ाए जाने और संघीय ढांचे का मुद्दा भी उठाया। समझा जाता है कि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं-सुदीप बंदोपाध्याय और डेरेक ओ ब्रायन ने लाभकारी सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून लाने का मुद्दा भी उठाया। बैठक में तृणमूल कांग्रेस ने 10 बिन्दुओं को उठाया, जिसमें महंगाई, बेरोजगारी, संघीय ढांचे का मुद्दा, मुनाफा कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का विनिवेश, कुछ राज्यों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र बढ़ाए जाने, संघीय ढांचे, कोविड-19 की स्थिति तथा महिला आरक्षण विधेयक आदि का मुद्दा शामिल है।  

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वहीं, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह बीच में ही बैठक छोड़कर बाहर निकल गए। सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि वे बैठक में किसानों, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने के विषय को उठा रहे थे, लेकिन बीच में ही टोका-टोकी की गई। सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस, वाईएसआर कांग्रेस और द्रमुक ने सुझाव दिया कि सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान महिला आरक्षण संबंधी विधेयक चर्चा के लिये लाया जाए। इन दलों ने कहा कि यह सही वक्त है, जब देश के नीति निर्माण के कार्यों में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। 

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सूत्रों ने बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाया और इसे जल्द राज्य का दर्जा प्रदान करने की मांग की। बहुजन समाज पार्टी ने किसानों के मुद्दे के अलावा दलितों के खिलाफ अत्याचार और पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा उठाया। समाजवादी पार्टी ने किसानों का मुद्दा उठाया और लखीमपुरी खीरी ङ्क्षहसा से जुड़े मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, जिनके पुत्र को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। 

 

 

 

 

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