जमींदारी संशोधन अधिनियम पर विपक्ष का वॉकआउट

  • Updated on 12/6/2018

देहरादून/ब्यूरो। उत्तराखंड में इनवेस्टरों को पहाड़ चढ़ाने के उद्देश्य से जमींदारी उन्मूलन अधिनियम को संशोधित प्रावधानों के साथ गुरुवार को सदन ने मंजूरी दे दी। इस दौरान कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष के बहिर्गमन के बीच ही उत्तराखंड आयुर्वेद विश्व विद्यालय (संशोधन) विधेयक 2018 को भी सदन की मंजूरी मिल गयी।

वीरवार को संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने विधानसभा में सदन के पटल पर उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) (अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश 2001) संशोधन विधेयक 2018 पेश किया था। शुक्रवार को इस पर चर्चा हुई। विधेयक के मुख्य बिंदु पर प्रकाश डालते हुए संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में उद्योग के लिए भूमि खरीदना आसान हो जाएगा। 

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इन्वेस्टर कुछ निश्चित प्रावधानों के तहत और शर्तों के  साथ अपनी आवश्यकता के अनुरूप जमीन खरीद सकेंगे। 12.5 एकड़ तक के प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदने की मंजूरी जिला प्रशासन देगा । इससे अधिक की मंजूरी शासन स्तर पर दी जाएगी। अधिनियम का विरोध करते हुए कांग्रेस विधायक मनोज रावत ने कहा कि पर्वतीय इलाकों में पूंजीनिवेश और उद्योग के नाम पर किसानों की जमीन को औने-पौने कीमत पर बेचने की साजिश हो रही है। 

बहुत जल्द पहाड़ के किसान भूमिहीन हो जाएंगे। मंत्री पंत ने कहा कि इन्हीं चीजों को देखते हुए विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि यदि जमीन का उपयोग खरीद की शर्तों के अनुसार नहीं किया गया तो वह राज्य सरकार को हस्तांतरित हो जाएगी। ट्रेजरी बेंच की ओर से आए जवाब पर विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के आह्वान पर कांग्रेस के विधायकों ने सदन का बहिष्कार कर दिया।

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