Tuesday, Nov 30, 2021
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outside states account for 64 percent of delhi''''s pollution: atul bagai

दिल्ली के प्रदूषण में 64 फीसदी हिस्सेदारी बाहरी राज्यों कीः अतुल बगई

  • Updated on 11/24/2021

नई दिल्ली/पुष्पेंद्र मिश्र। राजधानी दिल्ली हर वर्ष अक्तूबर, नवम्बर दिसम्बर में आने वाली प्रदूषण की समस्या पर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) इंडिया के प्रमुख अतुल बगई ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण स्थानीय और क्षेत्रीय दोनों वजहों से है। टेरी 2018 के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में परिवहन क्षेत्र से 28 फीसद, उद्योग-इंडस्ट्रीज से 30 फीसद, बॉयोमास जलाने से 15 फीसद प्रदूषण होता है। दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए पुराने वाहन जो ज्यादा प्रदूषण उत्सर्जित करते हैं उनपर रोक लगाने की आवश्यकता है। जो उद्योग धंधे कोयले या अन्य ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल कर संचालित हैं उन्हें गैस पर शिफ्ट करने की जरूरत है। बॉयोमास बर्निंग रोकने के लिए एक निगरानी तंत्र गठित करने की आवश्यकता है। कचरा प्रबंधन के जरिए भी इससे निजात मिल सकती है। 

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बाहरी राज्यों की पराली से दिल्ली में 40 फीसद बढ़ता है प्रदूषण 
अतुल ने कहा कि सेम्बी द्वारा 2020 में जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक इन दिनों हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के आस-पास के राज्यों में जलने वाली पराली का दिल्ली के प्रदूषण में 40 फीसद तक योगदान होता है। प्रदूषण के कारण अस्पतालों में बढ़ती मरीजों की संख्या को रोकने के लिए उन्होंने कहा इसे सार्वजनिक परिवहन बढ़ाकर, निरीक्षण और रखरखाव प्रणाली के आधुनिकीकरण, विद्धुतीकरण, उद्योगों में एलपीजी को लाने और निर्माण कार्य व सडक़ों की धूल को पर नियंत्रित करके रोका जा सकता है। बगई ने कहा कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए लॉकडाउन विकल्प नहीं है बल्कि हमें प्रदूषण के उत्सर्जन को रोकने पर काम करना होगा।

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वाहनों के इलेक्ट्रिकरण से 2040 तक भारत को हो सकता है 60 अरब रुपए का फायदा 
इलेक्ट्रिक वाहनों पर उन्होंने कहा कि आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के मुताबिक अगर हर राज्य में वाहनों के विद्युतीकरण कर दिया जाए तो हम 70380 अकाल मौतें रोकने में कामयाब होंगे। जिससे 2040 तक अर्थव्यवस्था में 80.7 बिलियन यूएस डॉलर (तकरीबन 60 अरब रुपए) का लाभ होगा। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बना इंटर गवर्नमेंट पैनल (आईपीसीसी) 2018 के मुताबिक 2035-40 तक वाहनों के इलेक्ट्रिकीकरण द्वारा ग्लोबल वार्मिंग में 1.5 डिग्री से. की गिरावट लाई जाएगी। राजधानी में सर्दियों में होने वाले प्रदूषण का 64 फीसद योगदान बाहरी दिल्ली से बाहर हो रही गतिविधियों से आता है। जिसमें इंडस्ट्रीज, पॉवर प्लांट्स, बॉयोमास बर्निंग, घरेलू कारण व कृषि क्षेत्र में जलाए गए पराली आदि शामिल हैं। प्रदूषण के दौरान हमें इससे बचाव के तरीकों पर पूरा ध्यान देना होगा। बाहरी गतिविधियों को कम करना होगा। एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना होगा। 

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2030 तक भारत कार्बन उत्सर्जन में लाएगा 45 फीसद की कमी 
अगर ये प्रदूषण लगातार इसी तरह साल दर साल बढ़ता रहा तो यूएनईपी की रिपोर्ट के मुताबिक हमें प्रति वर्ष लाखों लोगों की अकाल मृत्यु का सामना करना होगा। ये श्वसन हृदय समेत कई तरह की बीमारियों से मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा। 2010 की तुलना में भारत को सीओ2 उत्सर्जन में 2030 तक 45 फीसद की कमी लानी है। वहीं 2050 तक इसे नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना है। 
 

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