Wednesday, Dec 01, 2021
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over speeding is causing more deaths

ओवरस्पीडिंग से हो रही हैं ज्यादा मौतें

  • Updated on 9/11/2021

15 वर्ष से 49 वर्ष की आयु में मृत्यु और स्वास्थ्य नुकसान की मुख्य वजह है दुर्घटना 

विकलांगता को रोकने लिए राष्ट्रव्यापी इंजरी प्रीवेंशन प्रोग्राम की जरूरत 

नई दिल्ली/अंकुर शुक्ला। देश में ओवरस्पीडिंग जानलेवा साबित हो रही है। केवल इतना ही नहीं ओवरस्पीडिंग के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से अप्राकृतिक विकलांगता के मामले भी बढ़ रहे हैं। जिनमें खासी तादाद स्पाइन इंजरी से संबंधित मामलें हैं। विशेषज्ञों ने न केवल इसपर चिंता व्यक्त की है बल्कि राष्ट्रव्यापी इंजरी प्रीवेंशन प्रोग्राम की जरूरत पर भी जोर दे रहे हैं। 


सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमोआरटीएच) के अनुसार ओवरस्पीडिंग के कारण मरने वालों की संख्या 2014 में 58,000 से बढ़कर 2018 में 98,000 हो गई है, जबकि शराब पीकर गाड़ी चलाने से मरने वालों की संख्या में कमी आई है और यह  7,000 से घटकर 4,200 रह गई है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि 50 किमी/घंटा और 80 किमी/घंटे के बीच गाडी की रफ्तार होने से दुर्घटना में मौत की संभावना 20 से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाती है।

चोट निवारण कार्यक्रम से आएगी मौत में कमी : 

डॉक्टरों और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स और कम्युनिटी के लीडर्स ने सड़क दुर्घटना में होने वाली चोटों को बीमारी के रूप में मानकर निगरानी करने की जरुरत को दोहराया है। विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रव्यापी इंजरीज प्रीवेंशन प्रोग्राम (चोट निवारण कार्यक्रम) की स्थापना न केवल मौतों को कम करके बल्कि विकलांगता को भी कम करके आम लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करेगा।

दुनिया भर में प्रचलित चोट की रोकथाम के लिए अपनाई जाने वाली आदतों पर ध्यान देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (स्वास्थ्य महानिदेशालय) के असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल डॉ मानस प्रतिम रॉय के मुताबिक सड़क दुर्घटना में होने वाली चोटों को रोकने के लिए नेशनल इंजरी सर्विलांस, ट्रॉमा रजिस्ट्री और कैपेसिटी बिल्डिंग (एनआईएससी) की स्थापना की गई है। सरकार देश भर में चोटों की रोकथाम और प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए सिस्टम को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। 

15 से 49 वर्ष के लोग अधिक प्रभावित : 

 सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) डेटा से पता चलता है कि 15 वर्ष से 49 वर्ष की आयु के भारतीयों में मृत्यु और सेहत में नुकसान होने के चार कारणों में से एक सड़क दुर्घटना के दौरान चोट है। 

  

मृत्यु का 8वां प्रमुख कारण है सड़क दुर्घटना : 

 स्पाइनल कॉर्ड सोसाइटी के अध्यक्ष,डॉ एच एस छाबड़ा के मुताबिक सड़क दुर्घटना में वाली चोटों के आंकड़े को घ्यान में रखते हुए चोट की घटनाओं को रोकने की जरुरत है।सड़क दुर्घटनाएं सभी आयु वर्ग में मृत्यु का 8 वां प्रमुख कारण हैं। यह आंकड़ा टीबी, एचआईवी-एड्स या डायरिया संबंधी बीमारियों को पीछे छोड़ देता है। जितनी मौतें इन बीमारियों से नहीं होती है उतनी सड़क दुर्घटना से हो जाती हैं हैं। 2017 में सीट बेल्ट न पहनने से सड़क दुर्घटना में करीब 26,896 लोग मारे गए। चोटों को एक बीमारी के रूप में वर्गीकृत करने पर इसे रोकने के लिए योजना बनाने, जांच करने और इन योजनाओ को अमल में लाकर इन चोटों को रोकने में मदद मिलेगी। 

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