Sunday, Oct 02, 2022
-->
oxford trail coronavirus vaccine manufacturing india pragnt

ऑक्सफोर्ड में हुआ कोरोना वैक्सीन का ट्रायल, 1 अरब Vaccine बनाने का भारत से हुआ करार

  • Updated on 6/6/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। पूरे विश्व में फैले कोरोना वायरस (Coronavirus) ने इस समय आतंक मचा रखा है। ऐसे में हर देश जल्द से जल्द इस वायरस की वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए कई बड़े शोधकर्ताएं इसकी वैक्सीन (Vaccine) को लेकर ट्रायल कर रहे हैं। इसी लिस्ट में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (University of Oxford) का भी नाम शामिल है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने AZD1222 नाम से कोरोना की वैक्सीन तैयार की है। जिसका अभी ट्रायल चल रहा है। 

अमेरिका ने खोजा कोरोना वैक्सीन ...

इस वैक्सीन का अभी शुरुआती ट्रायल चल रहा है। जिसमें ये सफल रही है। पॉजिटिव रिजल्ट आने के बाद इस वैक्सीन को दूसरे लेवल पर ट्रायल किया जा रहा है। इस ट्रायल के बारे में बात करते हुए दवाईं कंपनी एस्‍ट्राजेनेका (AstraZeneca) के सीईओ पैस्कल सोरिअट ने बताया कि हर देश की तरह हम भी इस वायरस का खात्मा चाहते हैं जिसके लिए ये वैक्सीन बनाई जा रही है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सभी ट्रायल के बाद भी अगर वैक्सीन काम नहीं करती है तो सारी मेहनत बेकार जाएगी। इसलिए जब तक WHO इस महामारी के खात्मे की घोषणा नहीं कर देता तब तक कंपनी इस वैक्सीन से पैसे नहीं कमाएगी।

Coronavirus: इजरायल के वैज्ञानिक ने ...

इटली ने मई की शुरुआत में किया था कोरोना की पहली दवाई का दावा, लोगों को अब भी इंतजार

1 अरब वैक्सीन बनाने का करार
वहीं पैस्कल सोरिअट ने कहा कि हमने भारत से पहले ही इस वैक्सीन को लेकर करार कर लिया है। उन्होंने बताया कि भारत के सीरम इंस्टीट्यूट से हमने 1 अरब वैक्सीन के उत्पादन का एग्रीमेंट साइन किया है। जिसका लक्षय 2021 तक वैक्सीन के करीब 1 अरब डोज बनाना है। वहीं एस्ट्राजेनेका कंपनी ने अमेरिका को 40 करोड़ वैक्सीन, ब्रिटेन को 10 करोड़ वैक्सीन सप्लाई करेगी। लेकिन ये तभी संभव है जब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में बन रही वैक्सीन सही काम करेगी। 

कब तक आ सकती है कोरोना वायरस की ...

जब राहुल गांधी ने हार्वर्ड प्रोफेसर से पूछा- भैया, ये बताइए वैक्सीन कब आएगी ?

ट्रायल के लिए बच्चों और बुजुर्गों को चुना गया
आपको बता दें कि इस वैक्सीन को लेकर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी अगस्त तक साफ कर देगी। इस वैक्सीन के ट्रायल के लिए सबसे पहले 18 से 55 साल के लोगों को चुना गया। पहला ट्रायल सफल होने के बाद दूसरे और तीसरे चरण का ट्रायल शुरु किया गया। हालांकि तीसरे चरण के लिए यूनिवर्सिटी ने बुजुर्गों के साथ ही बच्चों को भी चुना है। सभी ट्रायलों को मिलाकर करीब 10,000 से अधिक लोगों पर ट्रायल होना है।

कोरोना से जुड़ी बड़ी खबरों को यहां पढ़ें...

comments

.
.
.
.
.