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PAK''s cruel face Exposes, Waziristan''s voice gets force: Indresh Kumar, musrnt

PAK का क्रूर चेहरा बेनकाब, वजीरिस्तान की आवाज को मिला बलः इंद्रेश कुमार

  • Updated on 6/29/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। फैन्स (फोरम फॉर अवेयरनेस ऑफ नेशनल सिक्योरिटी ) की ओर से रविवार को वजीरिस्तान (पश्तून तहफूज मूवमेंट) के पहचान का संकट नामक विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार में देश-विदेश के कई नामचीन हस्तियों ने हिस्सा लिया। इस वेबिनार के शुरुआती सत्र को संबोधित करते हुए फैन्स के राष्ट्रीय संरक्षक व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल सदस्य इंद्रेश कुमार ने पश्तून लोगों के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि आज पाकिस्तान की करतूत पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।

पश्तून समुदाय के लोगों पर पाकिस्तान सरकार व पाक सेना की ओर से विगत कई दशकों से अनवरत अत्याचार किए जा रहे हैं। वहीं, पश्तून समुदाय के लोगों ने अब अपनी अस्मिता व पहचान को लेकर अपनी लड़ाई तेज कर दी है। पश्तून तहफूज मूवमेंट के तहत अब इस समुदाय के लोग कुर्बानियां देने के लिए तैयार हैं। समय के साथ अब पश्तूनों का यह आंदोलन पूरे सीमाई क्षेत्र में जोर पकड्ता जा रहा है। आज पाकिस्तान खुद भी आंतरिक तौर पर कई आंदोलनों से जूझ रहा है।

यूं कहें कि पाकिस्तान आज कई आंदोलनों में विभाजित है और कई तरह का चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसीके मद्देनजर अब पाकिस्तान पश्तूनों के आंदोलन को दबाने व कुचलने में लगा है। अफगानिस्तान की सीमा से लेकर कश्मीर तक जितने भी पश्तून हैं, उन्हें तरह तरह की यातनाएं दी जा रही हैं। इस समुदाय की महिलाओं, युवाओं पर खासा जुल्म किया जा रहा है।

इंद्रेश कुमार ने पाकिस्तान की करतूतों को उजागर करते हुए कहा कि वहां की सरकार और सेना दोनों मिलकर पश्तून समाज के लोगों पर काफी बर्बरतापूर्ण कार्रवाई कर रही है। इनके मानवाधिकारों को कुचला जा रहा है, बहू-बेटियों की इज्जत को तार तार किया जा रहा है। पाकिस्तान में इस समुदाय के लोगों पर अत्याचार की खबरें अब दुनिया के सामने आने लगी है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के क्रूर चेहरे को अब वैश्विक पटल पर उजागर किए जाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पश्तून आंदोलन की कुछ महत्वपूर्ण बातों को भी दुनिया के लिए जानना जरूरी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दुनिया भर में पश्तूनों को एकजुट होकर अपनी स्वायत्ता को लेकर संघर्ष जारी रखना चाहिए।

फैन्स के जनरल सेक्रेट्री (संगठन महामंत्री) गोलोक बिहारी राय ने वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि पश्तूनों की अपनी अस्मिता का यह आंदोलन वित सात दशकों से चला आ रहा है। पश्तूनों की वर्तमान युवा पीढ़ी अपनी स्वतंत्रता और मानवाधिकार के मूल्यों को भलीभांति पहचान और समझ रही है। जिसका अर्थ मंसूर पश्तून के नेतृत्व में ‘ये जो गुंडागर्दी है, इसके पीछे वर्दी है‘ नारे के साथ पाकिस्तानी सेना को चुनौती देते हुए पूरा पश्तून समाज अपनी अस्मिात की रक्षा के लिए एक साथ खड़ा है। 2019 में 22 शहरों में एक साथ इसका हुआ शांतिमय प्रदर्शन इसका प्रत्यक्ष गवाह है।

पश्तून तहफूज मूवमेंट, यूरोप के संस्थापक औरंगजेब खान ने वेबिनार में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पश्तूनों के दुख-दर्द को हिंदुस्तान बेहतर तरीके से समझता है। उन्होंने कहा कि पश्तूनों की आबादी का अधिकांश हिस्सा आज भी पाकिस्तान के क्षेत्र में ही रहता है। पाकिस्तान की सेना ने हमेशा से तालिबान को संरक्षण देकर पश्तूनों व दूसरे समुदायों को बर्बर तरीके से सताया। उन्हें लक्ष्य बनाकर यातनाएं दीं और कई जगहों पर विस्थापित भी किया। पाकिस्तान का असली चेहरा तब सामने आया जब दक्षिणी वजीरिस्तान में पश्तूनों पर कई तरह के जुल्म किए। 

वहीं, आईसीडब्ल्यूए के रिसर्च फेलो आशीष शुक्ला ने कहा कि पश्तून तहफूज मूवमेंट अब पश्तूनों की आवाज बन चुका है। पिछले तीन-चार सालों में यह आंदोलन परवान चढ़ने लगी है और इसकी आवाज दुनिया में सुनी जाने लगी है। प्रतीक जोशी (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी) लंदन ने पश्तूनों के संघर्ष पर विचार रखते हुए कहा कि काबुल से लेकर कश्मीर तक पाकिस्तान ने  छद्म युद्ध (प्राॅक्सी वार) छेड़ रखा है

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