Sunday, Jan 26, 2020
pakistan again raises j&k issue in serbia, furious shashi tharoor

सर्बिया में पाकिस्तान ने फिर उठाया J&K का मुद्दा, भड़के शशि थरूर

  • Updated on 10/14/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। एशियाई पार्लियामेंट्री असेंबली (Asian Parliamentary Assembly) का आयोजन सर्बिया (Serbia) की राजधानी बेलग्रेड (Belgrade) में किया गया जिसमें कांग्रेस (Congress) नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) शामिल हुए। बैठक के दौरान थरूर कश्मीर का उल्लेख करने को लेकर पाकिस्तान (Pakistan) पर भड़क गए।

दरअसल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला (Om Birla) के नेतृत्व में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल इंटर पार्लियामेंट्री यूनियन (Inter-Parliamentary Union) की 141वीं असेंबली सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में है। जिसमें भारतीय प्रतिनिधिमंडल में सभी पार्टियों के सांसद शामिल हैं जिनमें शशि थरूर, कनिमोझी करुणानिधि, वानसुक स्याम, राम कुमार वर्मा और सस्मित पात्रा जैसे जन प्रतिनिधि शामिल हैं।

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पाकिस्तान मंच का राजनीतिकरण की कोशिश कर रहा है
दरअसल बैठक में पाकिस्तान ने कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में ताजा हालात के मद्देनजर इस बैठक का आयोजन अपने यहां नहीं करा सकता है। शशि थरूर ने कहा कि पाकिस्तान, भारत के आंतरिक मामले का हवाला देकर इस मंच के राजनीतिकरण की कोशिश कर रहा है।

बता दें कि बेलग्रेड में 13 से 17 अक्टूबर तक इंटर-पार्ल्यामेंट्री यूनियन की सालाना बैठक चल रही है वहीं एपीए की बैठक हुई। सूत्रों से पता चला है कि पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन सीनेट के चेयरमैन ने एक पत्र के जरिये इस फोरम को बताया कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के ताजा हालात के कारण दिसंबर 2019 में पूर्वनिर्धारित बैठक का आयोजन नहीं कर पाएगा। जिस पर शशि थरूर ने अपने संबोधन में पाकिस्तान के इस पत्र की कड़ी निंदा की।

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जम्मू-कश्मीर में ऐसे हालात नहीं  कि पाकिस्तान पर असर पड़े
पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने पाकिस्तानी सीनेट के चेयरमैन पर निशाना साधा और कहा कि भारत के आंतरिक मामले का हवाला एपीए के गैर-जरूरी राजनीतिकरण के लिए दिया गया। थरूर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारतीय संघ का अभिन्न अंग है और जम्मू-कश्मीर में इस प्रकार के हालात नहीं हैं जिससे पाकिस्तान में कहीं पर भी आम जनजीवन या कामकाज की स्थिति पर कोई फर्क पड़े। सिर्फ स्थितियां बदली हैं।

थरूर ने आगे कहा कि भारत के आंतरिक मामलों का असर सिमा पर नहीं होता, और न ही पड़ोसियों पर इसका कोई असर होता है। इस कारण पाकिस्तानी सीनेट के चेयरमैन उम्मीद करते हैं कि यह प्रतिष्ठित सभा दिसंबर 2019 में अपनी बैठक आयोजित करने की पाकिस्तान की अक्षमता अथवा अनिच्छा के पीछे उसकी ऐसी बहानेबाजी को स्वीकार किया जाए। तो ये वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है।

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