pakistan diplomatic relations with india break trade ends and threatens to move kashmir to un

कश्मीर को लेकर अपने ही बुने जाल में फंस सकता है पाकिस्तान!

  • Updated on 8/8/2019

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर।  एक कहावत है कि रस्सी जल गई लेकिन ऐंठन नहीं गई, यह हिन्दी का प्रसिद्ध मुहावरा पाकिस्तान पर बिल्कुल फिट बैठता है। पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ एक बार फिर से रिश्तों में खटास आना तय माना जा रहा है। पाकिस्तान ने बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए भारत के राजूदत को वापस नई दिल्ली के लिए उड़ान भरने का आदेश दे दिया है। साथ ही व्यापारिक रिश्तों को तोड़ने का एकतरफा ऐलान भी कर दिया है। इससे भी महत्वपूर्ण भारत को धमकी देते हुए कहा है कि वो कश्मीर मुद्दों को संयुक्त राष्ट्र में ले जाएगा। हालांकि इन सब फैसलों के पीछे की वजह स्पष्ट है कि भारत ने जैसे ही जम्मू और कश्मीर से धारा 370 खत्म करने का आदेश दिया है, इसकी धमक से पाकिस्तान में हलचल मच गई है। 

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कश्मीर पर पकड़ कम हुई पाक की

अब पाकिस्तानी सेना को यह महसूस होने लगा है कि जिस कश्मीर को लेकर वहां के लोकतंत्र को ही पिछले 70 साल से खत्म करके रख दिया है। अगर कश्मीर हाथ से निकल गया तो उसकी जमीन भी खिसक जाएंगी। वहां के किसी भी सरकार को आज तक अगर अस्थिर करने में यदि पाक सेना सफल रही तो उसका कारण है कि कश्मीर को लेकर पाक जनता को भ्रमित करके लोकतंत्र को कमजोर कर दिया।  

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पीएम मोदी ने पाक के नब्ज पर हाथ रख दी 

पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सीधे पाकिस्तान के नब्ज पर हाथ रखने का साहस कर दिया है। अब यह साफ है कि कश्मीर मुद्दे को लेकर जिस तरह मोदी सरकार ने आगे बढ़ने का फैसला किया है, वहां से पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता है। अगर इस फनफनाती पाक के सर को समय रहते कुचल दिया जाए तो सिर्फ कश्मीर ही नहीं इस क्षेत्र में ही हमेशा के लिए शांति स्थापित हो जाएगी।  

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पाकिस्तान में आर्थिक बदहाली चरम पर

यही वहीं पाकिस्तान हैं जहां एक बालाकोट हमले से अभी तक उबर नहीं सका है। पाकिस्तान में महंगाई अपने चरम पर है। वहां बेरोजगारी के चलते युवा दर-दर भटकने को मजबूर है। आर्थिक मोर्चा के यह हालात है कि पैसे को लेकर कभी अमेरिका तो कभी मुद्रा कोष के सामने हाथ फैलाये खड़ा रहता है। वो पाकिस्तान अगर भारत को धमकी देने का दुस्साहस करता है तो जो मिजाज है मोदी सरकार का, ऐसे में करारा जवाब दिये जाने की पूरी-पूरी संभावना है। पाकिस्तान फिर से अपनी सीमा को लांघने की कोशिश की है। कश्मीर को लेकर अगर अपनी पुरानी नीति में बदलाव नहीं किया तो शायद आने वाले दिनों में दुर्गति हो सकती है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।

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भारत के लोकसभा चुनाव खर्चे के बराबर पाक के पास मुद्रा भंडार

सबसे मजेदार बात तो यह है कि भारत जितना बीते लोकसभा चुनाव में खर्च किये, बस उतना ही विदेशी मुद्रा भंडार बचा है। यानी भारत ने लोकसभा चुनाव 2019 में कुल खर्च किये लगभग 7 अरब डॉलर और ठीक इतना ही पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार बचा है। वो पाकिस्तान भारत को धमकी देता है कि युद्ध अगर हो जाए तो वो पीछे नहीं हटेगा। दूसरी बात पाकिस्तान की आर्थिक नीति पूरी तरह आईएमफ के इशारे पर चलती है। आईएमफ ने 6 अरब डॉलर के कर्ज देने वक्त ही पाकिस्तान से शर्त करा लिया था। फिर भी पाकिस्तान के होश ठिकाने पर नहीं है। 

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भारत ने कश्मीर पर मीडिएटर की भूमिका को खारिज किया

यह वो पाकिस्तान है जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने पैसा के लिए मिमयाता है और कश्मीर को बचाने की गुहार करता है। तो वहीं भारत अमेरिका समेत दुनिया को संदेश बार-बार देता रहा है कि कश्मीर को लेकर कभी-भी मीडिएटर की भूमिका को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसका ताजा उदाहरण है कि कश्मीर से धारा 370 को खत्म करके ऐलान कर दिया है।     

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पाकिस्तान कर्ज से लदा हुआ है

यह वहीं इमरान खान है जो सत्ता में आने से पहले वायदे करते-फिरते थे कि वे कर्ज नहीं लेंगे। लेकिन हालात बता रहे है कि पाकिस्तान के आर्थिक हालात अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। जिसका भगवान ही मालिक है। जब से इमरान खान पीएम बने है तब से रुपये की गिरावट 29 प्रतिशत नीचे चली गई है। पाकिस्तान में पीएम कोई भी हो लेकिन कर्ज से देश को लादना नहीं छोड़ा है। तभी तो पिछले 10 साल में ही कर्ज 30 हजार अरब रुपये तक जा पहुंचा है, जबकि यह कर्ज 6 हजार अरब रुपये पर स्थिर था। पाकिस्तान की एक ओर चिंता है कि वहां टैक्स कलेक्शन सबसे कम है। जिससे देश का खर्च चलाने के लिए पैसा कम पड़ जाते है। लेकिन फिर भी पाकिस्तान अपने हरकत से बाज नहीं आना चाहता है। 

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ईरान में चाबहार बंदरगाह को भारत ने बनाया

हालांकि भारत ने पाकिस्तान को पहले ही जोरदार झटका तब दिया जब ईरान में चाबहार बंदरगाह को बनाकर सीधा अफगानिस्तान तक अपना सामान पहुंचा देता है। भारत ने ईरान में अरबों रुपये निवेश करके सड़क पाकिस्तान को आईना दिखा दिया है। इसका असर यह हुआ कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के व्यापार में कटौती हो गई।  

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भारत ने पहले ही MFN  का दर्जा किया था खत्म

अगर पाकिस्तान के तरफ से देखा जाए तो भारत को सीमेंट, खनिज और अयस्क, अकार्बनिक रसायन, कच्चा कपास, मसाले, ऊन, रबड़ उत्पाद, अल्कोहल पेय, चिकित्सा उपकरण, समुद्री सामान, प्लास्टिक, डाई और खेल सामान निर्यात करता रहा है। लेकिन भारत ने पुलवामा एटैक के बाद ही मोस्ट फैवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा पाकिस्तान का खत्म कर दिया था। इसलिए इस तरह के पाकिस्तान के कदम से भारत को कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन इतना तो तय है आज के एक तरफा निर्णय से पाकिस्तान ने अपने लिये ही गड्ढा ही खोद लिया है, जिसका दूरगामी असर होने वाला है। 
 

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