Wednesday, Oct 20, 2021
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pakistan is not the first time exposed for spying india always exposed albsnt

पहली बार नहीं हुआ है पाकिस्तान जासूसी को लेकर बेनकाब, भारत ने हमेशा किया बेपर्दा

  • Updated on 6/1/2020

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। पूरी दुनिया जब वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Corona Virus) से लड़ रहा हो तब पाकिस्तान अपनी औछी हरकत के कारण चर्चा में बना रहता है। पाकिस्तान ने कोरोना काल के दौरान भी भारत के खिलाफ कभी OIC में आवाज बुलंद करना तो कभी कश्मीर राग अलापना जैसे सामान्य रणनीति का स्थायी हिस्सा बना लिया है। इसी कड़ी में भारत में जासूसी को भी अंजाम देता रहा है।  भारत ने नई दिल्ली स्थित पाक उच्चायोग के दो अधिकारियों को उस समय देश छोड़ने का अल्टीमेटम जारी किया जब वे लोग एक जासूसी में संलिप्त थे।

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ऐसा नहीं है कि जासूसी सिर्फ पाकिस्तान ही अपने पड़ोसी देश में कराता है। दुनिया भर में इसकी एक अलग ही मिशाल  है। जहां गुमनाम होकर अपने देश के लिये जासूसी करने वाले ऐसे लोग अपनी जान की परवाह किये बगैर कुछ न कुछ हासिल करने के फिराक में रहते है। लेकिन पाकिस्तान का यह जासूसी प्रकरण राजनयिक संबंध के लिये तय प्रोटोकाल का सरासर उल्लंघन है। जिसके बाद ही आबिद हुसैन और ताहिर खान को देश छोड़ने के लिये 24 घंटे का वक्त दिया गया है। यह दोनों व्यक्ति पाकिस्तान के ISI के इशारे पर काम करते थे। यहां तक कि फर्जी आधार कार्ड बनाकर यह लोग दिल्ली में यात्रा भी करते थे।ताकि उन पर शक न हो। इसके अलावा ड्राइवर जावेद को भी गिरफ्तार किया गया है।

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यहां यह बताना जरुरी है कि भारत में जासूसी करते हुए पाकिस्तानी पहली बार Expose नहीं हुआ है। लेकिन यहां यह समझना जरुरी है कि दूसरे देशों में स्थित दूतावास में कूटनीतिक मिशन के तहत ही राजदूतों को भेजे जाने की परंपरा रही है। जहां उच्च मापदंड अपनाने की अपेक्षा की जाती है। इसके वाबजूद पाकिस्तान की यह हरकत कूटनीतिक मिशन का यह सीधा-सीधा उल्लंघन है। उधऱ पाकिस्तान ने भारत के फटकार लगाने पर हमला किया है। इसे जानबूझकर कश्मीर और कोरोना वायरस से  ध्यान भटकाने का साजिश करार दिया है। जो बेहद हास्यास्पद है।

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पाकिस्तान कभी हनी ट्रेप तो कभी भारत के ही पूर्व राजनयिक को अपने विश्वास और प्रलोभन देकर जासूसी कराता रहा है। पाकिस्तान में स्थित भारतीय दूतावास में कार्यरत माधुरी गुप्ता पर भी पाकिस्तान को गुप्त जानकारी देने का आरोप लगा। जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी भी हुई। उन्हें तीन साल की सजा भी हुई है। जबकि भारत के 11 नौसेना कर्मी को पाकिस्तान ने सोशल मीडिया के माध्यम से हनी ट्रेप के द्वारा जाल में फंसाया था। इसी तरह जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के साथ मिलीभगत के कारण डीएसपी दविंदर सिंह की गिरफ्तारी भी हुई थी।

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मतलब साफ है कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ एक तरह से अघोषित युद्ध ही छेड़ रखा है। जिसके लिये जासूसी करना उसके खास रणनीति का हिस्सा बना रहा है। लेकिन भारत के चाक-चौबंद चौकसी का ही परिणाम रहा है कि हर बार पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ती है। फिर हनी ट्रेप का मामला हो या कश्मीर में जासूसी करके भारत के खिलाफ साजिश रचना रहा हो,हर बार नाकाम ही हुआ है।

 

 

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