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कश्मीर के घटनाक्रम पर पाकिस्तान द्वारा भारत को युद्ध की धमकी

  • Updated on 8/8/2019

भारत (India) की कोशिश हमेशा पाकिस्तान (Pakistan) से संबंध सामान्य करने की रही है। इसीलिए पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के निमंत्रण पर श्री अटल बिहारी वाजपेयी 21 फरवरी, 1999 को बस लेकर लाहौर गए और वहां परस्पर मैत्री एवं शांति के लिए लाहौर घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए परंतु कुछ ही समय बाद मुशर्रफ ने नवाज का तख्ता पलट कर इन प्रयासों को विफल कर दिया। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 25 दिसम्बर, 2015 को अफगानिस्तान से लौटते समय अचानक लाहौर में उतरे और नवाज शरीफ से सद्भावना भेंट की। हवाई अड्डे पर स्वयं नवाज शरीफ उनकी अगवानी करने आए थे। 
18 अगस्त, 2018 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद इमरान खान ने भारत से संबंध सुधारने की दिशा में कुछ सकारात्मक घोषणाएं भी कीं परंतु उनके प्रयास सफल होते दिखाई नहीं दे रहे। 
अब 5 अगस्त को भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश भाग समाप्त किए जाने के बाद, जिसे भारतीय संसद ने स्वीकृति दे दी है, तो पाकिस्तानी नेताओं में भारत के विरुद्ध रोष भड़क उठा है। 
ऐसा होना स्वाभाविक भी है क्योंकि जहां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लगातार पाकिस्तान का विरोध होता आ रहा है वहीं उन्हें भारत के हिस्से वाले कश्मीर में सक्रिय अलगाववादियों तथा अन्य गर्मदलीयों का पूरा समर्थन मिलता रहा है और जब भी पाकिस्तान से कोई नेता आता था तो वह कश्मीरी अलगाववादी सरगनाओं से भी अवश्य मिलता था।
इन अलगाववादियों और उनके परिजनों को न सिर्फ पाकिस्तान से पैसा मिलता है बल्कि इन्हें भारत सरकार की ओर से भी सिक्योरिटी तथा अन्य अनेक सुविधाएं मिली हुई थीं और दशकों से ऐसा ही चलता आ रहा था।
गौरतलब है कि अभी तक पाकिस्तान कश्मीर के मामले में अमरीका से मध्यस्थ की भूमिका निभा कर इस मामले को निपटाने के लिए कह रहा था परंतु भारत द्वारा कश्मीर के संवैधानिक इतिहास में 5 अगस्त को किए गए बदलाव को अमरीका और चीन ने उनका आंतरिक मामला बताते हुए इसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। 
हालांकि समूचे का समूचा जम्मू-कश्मीर भारत का अखंड भाग है और इसमें पाकिस्तान को किसी प्रकार की दखलअंदाजी करने का कोई अधिकार नहीं है परंतु 6 अगस्त को बुलाई बैठक में पाकिस्तान ने भारत सरकार को अनुच्छेद मुद्दे पर युद्ध की धमकी दे डाली है। 
इमरान खान के मंत्री फवाद चौधरी ने कहा है कि ‘‘हमें भारत का जवाब खून, आंसू और पसीने से देना होगा और जंग के लिए तैयार रहना होगा। भारत द्वारा पाकिस्तान को फिलस्तीन बनाने की कोशिश की जा रही है।’
इमरान ने भी कहा है कि ‘एक बार फिर पुलवामा जैसा हमला हो सकता है और दोनों देशों के बीच युद्ध के हालात बन सकते हैं। यह ऐसा युद्ध होगा जिसे कोई नहीं जीतेगा और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।’
पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल बाजवा ने भी धमकी दी है कि ‘‘कश्मीरियों की सहायता के लिए हमारे सैनिक किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।’
हालांकि 1965 से लेकर 1999 के कारगिल युद्ध (Kargil War) तक पाकिस्तान ने भारत के विरुद्ध लड़े 4 युद्धों में से हर युद्ध में बुरी तरह मुंह की खाई है और 1965 के युद्ध में तो रूस से हस्तक्षेप करवा के युद्ध रुकवाया परंतु अब एक बार फिर पाकिस्तान पर भारत के विरुद्ध युद्ध का उन्माद सवार हो रहा है। 
संभवत: इसी प्रकार के घटनाक्रम की आशंका के दृष्टिïगत कि पाकिस्तान कब कोई मूर्खता कर जाए, किसी भी असुखद घटना का सामना करने के लिए भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त सेना तैनात कर दी है। 
पाकिस्तान की यह धमकी सरासर मूर्खतापूर्ण है क्योंकि आज पाकिस्तान कंगाली के कगार पर खड़ा है। वहां एक रोटी 35 रुपए की है और पैट्रोल 105 रुपए लीटर हो गया है तथा देश में बेरोजगारी की दर भी ङ्क्षचताजनक हद तक बढ़ चुकी है।
ऐसे में अपनी घरेलू समस्याएं दूर करने के प्रयास करने की बजाय भारत के साथ एक और युद्ध में उलझना पाकिस्तान को उसी प्रकार महंगा पड़ेगा जैसे पिछले युद्धों में उसे मुंह की खानी पड़ी है परंतु यदि वह भारत के विरुद्ध युद्ध छेडऩे की मूर्खता करता ही है तो उसका नुक्सान तो होगा ही कुछ नुक्सान हमारा भी होगा जिसका सामना करने के लिए हमें तैयार रहना होगा। 
इस बीच 7 अगस्त को देर शाम पाकिस्तान ने भारत से कूटनीतिक सम्बन्ध कमतर करने, द्विपक्षीय व्यापार रोकने, कश्मीर संबंधी विषय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाने तथा द्विपक्षीय व्यवस्था की समीक्षा करने के अलावा भारतीय उच्चायुक्त को निष्कासित करने का ऐलान किया है। यदि पाकिस्तान ऐसा कुछ करता है तो यह उसकी एक और भूल होगी।            —विजय कुमार 

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