Sunday, May 26, 2019

अंतरराष्ट्रीय दबाव के सामने झुका पाकिस्तान, मदरसों को लेकर इमरान ने लिया ये फैसला

  • Updated on 4/30/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते सोमवार को पाकिस्तान सरकार को मजबूरन एक बड़ा निर्णय लेना पड़ा है। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान की सरकार ने देश में चल रहे 30 हजार से ज्यादा मदरसों को सरकार के अधीन लेने का फरमान (Order) जारी किया है। इन मदरसों में अब धार्मिक पढ़ाई के साथ स्कूलों की तरह मुख्य विषयों को भी पढ़ाया जाएगा।

पाकिस्तान के मदरसों में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता रहा है। पाकिस्तान ने स्वयं इस बात के मानते हुए सोमवार को मदरसों पर बड़े फैसले का ऐलान किया है। पाकिस्तानी आर्मी के प्रवक्ता (Spokeperson) मेजर जनरल आसिफ गफूर ने भी कहा है कि 'पाकिस्तान के मदरसे आतंकवाद (Terrorism) फैलाने में शामिल हैं।'

हालांकि, उन्होंने ऐसे मदरसों की संख्या काफी कम बताई है। साथ ही उन्होने रावलपिंडी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया की पाकिस्तान (Pakistan) में 1947 में 247 मदरसे थे जो 1980 में बढ़कर 2861 हो गए और अब मदरसों की संख्या अब 30,000 से ज्यादा है।

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सभी धर्मों का होगा सम्मान
उन्होने ये भी बताया कि मदरसों की आतंकवादी गतिविधियों पर काबू पाने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही सभी मदरसों को शिक्षा मंत्रालय के तहत लगाया जाएगा ताकि समसामयिक और सामाजिक विषयों को भी पढ़ाया जा सके। गफूर ने बताया कि 'अब मदरसों के लिए ऐसे पाठ्यक्रम बनाए जाएंगे, जिसमें नफरत भरे भाषण नहीं होंगे और छात्रों को सभी धर्मों का सम्मान करने की शिक्षा भी छात्रों को दी जाएगी।'

भारत के दबाव में लिया गया फैसला
आपको बता दें कि आतंकवाद को पालने वाले मदरसों पर पाकिस्तान का यह बड़ा फैसला भारत के दबाव में माना जा रहा है। क्योंकि भारत द्वारा दुनिया के तमाम मंचों से पाकिस्तान सरकार को आतंक का रास्ता छोड़ने और आतंकियों को शरण न देने की नसीहत खुलेआम दी गई है। हालांकि खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी नया पाकिस्तान बनाने का दावे करते हुए अपने मुल्क की जमीन का आतंक के लिए इस्तेमाल न होने की बात करते रहे हैं।

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वहीं पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान ने 182 मदरसों को अपने कंट्रोल में लेने और प्रतिबंधित आतंकी संगठन के 100 से ज्यादा आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था। साथ ही यह दिखाने का भी प्रयास किया था कि वह आतंकवाद के विरुद्ध कार्यवाही कर रहा है।

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पाकिस्तान हो सकता है ब्लैक लिस्ट

अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस तरह के निर्णय लेने के लिए पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाता आ रहा है। क्योंकि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की सूची में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है जहां से पाकिस्तान को आर्थिक सहायता मिलती है। पुलवामा हमले के बाद एफएटीएफ की एक टीम ने पाकिस्तान में जाकर प्रतिबंधित संगठनों पर कार्यवाही का जायजा लिया और बताया की अभी तक इन संगठनों के खिलाफ जांच तक नहीं की गई है। जिसके बाद से पाकिस्तान पर एफएटीएफ द्वारा ब्लैक लिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है।

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ऐसे में इमरान खान की सरकार द्वारा मदरसों पर लिया गया यह बड़ा फैसला दिखाता है कि पाकिस्तान में मदरसों को आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। वहीं अब भारत के दबाव ने उसे इस तरह की कार्यवाही करने के लिए मजबूर कर दिया है।

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