Sunday, Mar 29, 2020
participation of youths and nsui in congress decreased as rahul gandhi removed

राहुल गांधी के हटते ही कांग्रेस में घटी युवकों की भागीदारी, NSUI की भी अनदेखी

  • Updated on 10/7/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कांग्रेस (Congress) की कमान सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के हाथ आने के बाद पार्टी में उन युवाओं को हाशिए पर फेंका जाने लगा है, जिन्हें पार्टी अपना भविष्य बताती रही है। हरियाणा (Haryana) और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Elections, 2019) के लिए हाल में जारी हुई उम्मीदवारों की सूची से यह बात साफ हो गई। युवा कांग्रेस (Youth Congress) और एनएसयूआई (NSUI) की भागीदारी इन सूचियों में लगभग न के बराबर में दिखी है।

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राहुल के हटते ही NSUI और युवा कांग्रेस की भागीदारी घटी
युवा कांग्रेस ने संगठन की परंपरा के मुताबिक महाराष्ट्र (Maharashtra) में अपने 13 पदाधिकारियों और हरियाणा में सात पदाधिकारियों को टिकट देने की अनुशंसा की थी। महाराष्ट्र में युवा कांग्रेस से जुड़े सिर्फ तीन लोगों को टिकट दिया गया तो हरियाणा में युवा कांग्रेस के सिर्फ एक नेता शीशपाल केहरवाला को कालावंली विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया।

इसी तरह, एनएसयूआई ने हरियाणा में अपने दो पदाधिकारियों शौर्यवीर सिंह (Shauryaveer Singh ) के लिए पानीपत (Panipat) और वर्धन यादव (Vardhan Yadav) के लिए बादशाहपुर (Badshahpur) से टिकट मांगा था, लेकिन उसे मायूसी ही हाथ लगी। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के अध्यक्ष रहते पिछले साल युवा कांग्रेस की अनुशंसा पर मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव (Madhya Pradesh Legislative Assembly election) में 15 और राजस्थान विधानसभा चुनाव (Rajasthan Legislative Assembly election) में 12 टिकट दिए गए थे।

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पुराने नेताओं की फिर बढ़ी भूमिका
टिकट वितरण में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई की भागीदारी सुनिश्चित करने का श्रेय राहुल गांधी को जाता है। उन्होंने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र बनाने को संगठन के पदों के लिए वोट के जरिए निर्वाचन प्रक्रिया शुरू की थी। टिकट बंटवारे में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के लिए कोटा निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। अपने 19 साल के पहले कार्यकाल में सोनिया ने भी युवाओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच बैलेंस बनाने की भरसक कोशिश की थी लेकिन ज्यादातर विरासत में मिली सियासत करने वाले ही युवा आगे बढ़े। चाहे ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) रहे हों या जितिन प्रसाद (Jitin Prasada) अथवा मिलिंद देवड़ा (Milind Deora) या ऐसे कई चेहरे। सोनिया गांधी के दोबारा कमान संभालने के बाद नीति निर्धारण में कई पुराने नेताओं की भूमिका बढ़ गई है। इससे कभी टीम राहुल का हिस्सा रहे कई युवा नेता खुद को असहज पा रहे हैं। राहुल गांधी के हटने के बाद पार्टी के कई युवा नेता खुलकर अपनी उपेक्षा का आरोप लगा चुके हैं।

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कई युवा नेताओं ने पार्टी छोड़ी
हरियाणा में अशोक तंवर (Ashok Tanwar) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में अदिति सिंह (Aditi Singh) एवं महाराष्ट्र में संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) ने बागी तेवर अपनाए हैं। इसके पहले झारखंड (Jharkhand) के प्रदेश अध्यक्ष रहे अजय कुमार (Ajoy Kumar) न केवल पद छोड़ दिया था बल्कि पार्टी छोड़ कर ही चले गए। राजस्थान (Rajasthan) में सचिन पायलट (Sachin Pilot) का अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के साथ नहीं बन रही है तो पंजाब (Punjab) में कैप्टन अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) से सियासी अदावत के चलते नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) भी सब छोड़ कर एक किनारे चले गए हैं। हालांकि पार्टी के एक वरिष्ठ महासचिव ने टिकट बंटवारे में युवाओं की अनदेखी के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि केवल युवा होना ही टिकट पाने का मानक नहीं हो सकता। हर टिकट पर काफी विचार-विमर्श होता है। स्थानीय जातीय, सामाजिक और सियासी समीकरणों को देखते हुए ही प्रत्याशी तय किया जाता है।

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