Monday, Mar 01, 2021
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ममता के नजदीकी रहे पीरजादा अब्बास सिद्दीकी बनाएंगे नई पार्टी, बंगाल की 100 सीटों पर है दबदबा

  • Updated on 1/21/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में इस साल अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाली फुरफुरा शरीफ दरगाह (Furfura Sharif cleric) के संस्‍थापक पीरजादा अब्बास सिद्दीकी (Abbas Siddiqui) अपनी राजनीतिक पार्टी की घोषणा करेंगे।

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फुरफुरा शरीफ की सियासी ऐलान
बंगाल चुनावों से पहले अब्बास सिद्दीकी ने बुधवार को कहा कि वह 21 जनवरी को एक अलग राजनीतिक दल की घोषणा करेंगे। बता दें कि जनवरी की शुरुआत में सिद्दीकी ने एआईएमआईएम (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद ओवैसी ने घोषणा की थी कि उनकी पार्टी मौलवी के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ेगी। गौरतलब है कि एक समय में सिद्दीकी मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के काफी करीबी रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मुखर समर्थक माने जाने वाले सिद्दीकी अब खुलकर राज्य की ममता सरकार पर हमला बोल रहे हैं। 

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60-80 सीटों पर लड़ेगी पार्टी- सिद्दीकी
सिद्दीकी ने संकेत दिया कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में रहने वाले मुसलमानों, दलितों और आदिवासियों के लिए एक मंच होगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी बंगाल विधानसभा चुनाव में 60-80 सीटों पर लड़ेगी। इतना ही नहीं मौलवी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह व्यक्तिगत रूप से चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि अब तक उन्होंने स्पष्ट रूप से प्रकट करने से इनकार कर दिया है कि वह आगामी चुनावों के लिए किसके साथ सहयोगी हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने 2016 के विधानसभा चुनाव में 294 सदस्यीय विधानसभा में 211 सीटों पर कब्जा कर लिया था।

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ओवैसी पर साधा निशाना - मोहम्मद याहिया
वहीं अब्बास सिद्दीकी के साथ अपनी बैठक के बाद ओवैसी पर निशाना साधते हुए बंगाल इमाम्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद याहिया ने कहा कि उनके समुदाय को पश्चिम बंगाल के बाहर से किसी मुस्लिम नेता की आवश्यकता नहीं है। धार्मिक कट्टरता को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि वे राज्य में मुस्लिम वोटों के विभाजन की अनुमति नहीं देंगे। इसके बाद एआईएमआईएम अध्यक्ष ने इस आरोप का हवाला दिया कि मुसलमानों के अविभाजित वोट ने 70 वर्षों से समुदाय के लिए कोई लाभांश प्राप्त नहीं किया था।

आपको बता दें कि बंगाल में हिंदू धर्म के साथ ही मुस्लिम धर्म के लोग भी रहते हैं। ऐसे मे यहां फुरफुरा शरीफ की दरगाह पूरे देश में विख्यात दरगाहों में से एक है। इसी दरगाह की मदद से पश्चिम बंगाल में राज कर रही ममता बनर्जी ने सिंगूर और नंदीग्राम जैसे दो बड़े आंदोलन किए थे क्योंकि यहां पर करीब 31 फीसदी वोटर्स  मुस्लिम है। इसलिए इन वोटर्स को गेम चेंजर माना जा रहा है।

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100 सीटों पर है इस दरगाह की माया
बीते कुछ महीनों से सीएम ममता बनर्जी और 38 वर्षीय अब्बास सिद्दीकी के बीचे कुछ ठीक नहीं चल रहा है। अब्बास सिद्दीकी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपने इस मोर्चे के साथ उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी मुस्लिमों की अनदेखी कर रही है। जिसका चुनाव में असर देखने को मिल सकता है। आपको बता दे कि बंगाल में फुरफुरा शरीफ की दरगाह का प्रभाव 100 सीटों पर है। ऐसे में इस वक्त अब्बास सिद्दीकी का ममता बनर्जी से खफा होना टीएमसी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। 

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