Tuesday, Nov 30, 2021
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पेगासस जासूसी विवाद: एक्सपर्ट कमेटी की निगरानी के लिए पूर्व जज रवींद्रन को किया नियुक्त

  • Updated on 10/27/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। पेगासस जासूसी मामले में जांच की निगरानी के लिए नियुक्त किये गये उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजू वरदराजुलू रवींद्रन उन पीठों का हिस्सा रहे हैं जिन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण को लेकर विवाद, 1993 के मुंबई श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट और प्राकृतिक गैस को लेकर कृष्णा-गोदावरी नदीघाटी विवाद जैसे बड़े मामलों में सुनवाई की। 

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प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने पेगासस स्पाईवेयर के इस्तेमाल से भारत में कुछ लोगों की जासूसी के आरोपों पर जांच करने के लिए साइबर विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय समिति की नियुक्ति की और न्यायमूॢत रवींद्रन को राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले में जांच के लिए निगरानी का कार्य सौंपा। 

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जस्टिस रवींद्रन का जन्म 15 अक्टूबर, 1946 को हुआ था और मार्च, 1968 में अधिवक्ता के रूप में उनका पंजीकरण हुआ था। उन्हें 22 फरवरी, 1993 को कर्नाटक उच्च न्यायालय का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और आठ जुलाई, 2004 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उन्हें नौ सितंबर, 2005 को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 15 अक्टूबर, 2011 को वह सेवानिवृत्त हो गये। 

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जस्टिस रवींद्रन 2013 में न्यूज ब्रॉडकासिंटिंग स्टैंडड्र्स ऑथोरिटी (एनबीएसए) के अध्यक्ष रहे। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गयी हैं। वह जस्टिस आर एम लोढा समिति के सदस्य भी रहे जिसने बीसीसीआई में कुछ ढांचागत सुधारों की सिफारिश की थी। 

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