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People get relief from inflation retail inflation stood at 4.59 percent in December prshnt

लोगों को मिली महंगाई से राहत, दिसंबर में 4.59 फीसद पर रही खुदरा मुद्रास्फीति

  • Updated on 1/13/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश में कोरोना माहामारी (Coronavirus Pandemic) के कारण अर्थव्यवस्था बूरे दौर से गुजर रहा था लेकिन अब ये धिरे-धिरे पटरी पर आ रहा है और साथ ही महगाई दर में कमी देखने को मिली है। दिसंबर में खुदरा महंगाई दर में कमी देखी गई। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से मंगलवार को आंकड़ा जारी किया गया जिसके मुताबिक, दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 4.59 फीसद पर आ गई। इससे पहले नवंबर में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 6.93 फीसद पर रही थी। 

आम लोगों, सरकार और आरबीआई के लिए खुदरा महंगाई दर से जुड़े ये आंकड़े काफी राहत भरी है क्योंकि इससे ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश बढ़ गई है। 

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खाने-पीने की वस्तुओं की कीमत में कमी
दरअसल अक्टूबर में मुद्रास्फीति मई 2014 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी। अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर 7.61 फीसद पर रही थी। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक खाने-पीने की वस्तुओं की कीमत में कमी से मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति में ये कमी आई। दिसंबर 2020 में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर घटकर 3.41 फीसद पर रह गई जो नवंबर, 2020 में 9.5 फीसद पर रही थी।

नवंबर, 2020 में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में 1.9 फीसद का संकुचन रही। अक्टूबर, 2020 में आईआईपी में 3.6 फीसद का ग्रोथ देखने को मिला था। जबकि नवंबर, 2021 में आईआईपी में 2.1 फीसद की वृद्धि रहा। 

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इन सामनों के बढ़ सकते हैं दाम
उपभोक्ताओं को रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले सामना जैसे तेल, साबुन, दंतमंजन और पैकेटबंद सामान खरीदने के लिए आने वाले दिनों में अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

इनका उत्पादन करने वाली कंपनियां कच्चे माल के दाम बढ़ने की वजह से अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पर विचार कर रहीं हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने तो पहले ही दाम बढ़ा दिए हैं, जबकि कुछ अन्य करीब से स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और मामले पर गौर कर रहीं हैं। रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली एफएमसीजी मैरिको और कुछ अन्य पहले ही दाम बढ़ा चुकीं हैं, जबकि डाबर, पारले और पतंजलि जैसी अन्य कंपनियां स्थिति पर करीब से निगाह रखे हुए हैं।

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इसपर पड़ेगा असर
नारियल तेल, दूसरे खाद्य तेलों और पॉम तेल जैसे कच्चे माल का दाम बढ़ने से एफएमसीजी कंपनियां पहले तो इस वृद्धि को खुद ही खपाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन वह लंबे समय तक अपने उत्पादों के दाम को स्थिर नहीं रख पायेंगी क्योंकि ऐसा करने से उनके सकल मार्जिन पर असर पड़ सकता है।

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