Tuesday, Oct 19, 2021
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permanent commission for women in navy service approved by supreme court

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, महिलाओं को मिला Navy में स्थायी कमीशन

  • Updated on 3/17/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक ऐतिहासित फैसला लेते हुए आर्मी (Army) के बाद अब नेवी (Navy) में महिलाओं को स्थायी कमीशन (Permanent commission) देने का फैसला लिया है। कोर्ट ने केंद्र की याचिका को खारिज करते हुए ये निर्णय लिया है। बेंच ने फैसला लेते वक्त पुरुष और महिला अधिकारियों के समान अधिकार की बात कही। 

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए बीजेपी (BJP) सांसद हेमा मालिनी (Hema Malini) ने कहा, 'आज कोर्ट ने नेवी में महिलाओं को स्थायी कमिशन दिया है। यह बहुत अच्छी खबर है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।' 

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जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली बेंच ने की सुनवाई
नौसेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन के मामले की सुनवाई जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली बेंच ने की। बेंच ने सुनवाई करते हुए  कहा कि,'जब एक बार महिला अधिकारियों की भर्ती के लिए वैधानिक अवरोध हटा दिया गया तो स्थायी कमीशन देने में पुरुष और महिलाओं के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।' बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा, कि केन्द्र द्वारा वैधानिक अवरोध हटा कर महिलाओं की भर्ती की अनुमति देने के बाद नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने में लैंगिक भेदभाव नहीं किया जा सकता है।

क्या होता है स्थायी कमीशन
स्थायी कमीशन लागू होने के बाद से कोई भी अधिकारी रिटायर होने तक स्वेच्छा से काम कर सकता है। इसके साथ ही अधिकारी रिटायर होने के बाद सरकार द्वार अधिकारियों को दी जाने वाली पेंशन भी पा सकता है। स्थायी कमीशन का लाभ शॉर्ट सर्विस कमीशन में काम कर रही महिला अधिकारियों को भी होगा। शॉर्ट सर्विस कमीशन के दौरान अधिकारियों को पेंशन से बंचित रखा जाता है साथ ही महज 14 साल में उन्हें रिटायर कर दिया जाता है। 

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महिला अधिकारियों को दिया गया स्थायी कमीशन
नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार युद्ध क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी इलाकों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमान देने के लिए बाध्य है। कोर्ट ने कहा कि सामाजिक और मानसिक कारण बताकर महिलाओं को इस अवसर से वंचित करना न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि अस्वीकार्य भी है।

सेना में महिलाओं को दिया जा चुका है स्थाई कमीशन
इससे पहले सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के साल 2010 में दिए गए फैसले पर मुहर लगा दी थी। स्थाई कमीशन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 साल पहले ही महिलाओं के हक में फैसला दिया था, लेकिन सरकार की लापरवाही के चलते महिलाओं को उनका हक नहीं मिला था। इसके बाद महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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स्थायी सेवा सेना में सभी महिला अधिकारियों के लिए लागू
मामले की सुवनाई करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के बाद केंद्र को महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देना चाहिए। स्थायी सेवा सेना में सभी महिला अधिकारियों के लिए लागू होगी, चाहे उनकी सेवा के वर्ष कितने भी हो। 

शारीरिक सीमाओं और मानदंडों को मुद्दा बना देना सही नहीं
कोर्ट ने कहा कि केंद्र द्वारा महिला अधिकारियों को एक अवसर से वंचित रखने के लिए शारीरिक सीमाओं और सामाजिक मानदंडों को मुद्दा बना देना सही नहीं है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन देने के फैसले पर मुहर लगी दी थी।

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