Tuesday, Jun 22, 2021
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निर्भया के गुनहगारों को अब 'गरुड़ पुराण' सुनाने के लिए मांगी इजाजत

  • Updated on 1/19/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। निर्भया (Nirbhaya) के गुनहगारों को 'गरुड़ पुराण' (Garuda Purana) सुनाने के लिए तिहाड़ जेल (Tihar Jail) प्रशासन से अनुमति मांगी गई है। जेल में बंद कैदियों को सुधारने के लिए काम करने वाले प्रदीप रघुनंदन (Pradeep Raghunandan) ने गत 12 जनवरी को तिहाड़ कारागार प्रशासन को पत्र लिखकर दोषियों को गरुड़ पुराण सुनाने की अनुमति मांगी है। हालांकि अभी तिहाड़ जेल प्रशासन की ओर से इस सिलसिले में कोई जवाब नहीं मिला है।

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नया डेथ वारंट जारी, 1 फरवरी को होगी फांसी
दिल्ली (Delhi) की एक अदालत ने निर्भया केस के चारों दोषियों को एक फरवरी को सुबह छह बजे फांसी पर लटकाने के लिए शुक्रवार को नया डेथ वारंट जारी किया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार अरोड़ा ने चारों दोषियों को एक फरवरी को सुबह छह बजे फांसी दिये जाने का आदेश देते हुए उन्हें मृत्युदंड दिये जाने में देरी पर निराशा प्रकट की। उन्होंने कहा, "यह मामला एक ऐसा परिदृश्य पेश करता है जब दोषियों को दया याचिका दाखिल करने का अवसर दिया गया लेकिन केवल एक ने इसे दाखिल किया। यह देरी करने की चाल हो सकती है। यह कितने लंबे समय तक चलेगा? मौत का वारंट जारी नहीं किया जाता तो दोषी अपने कानूनी उपायों की दिशा में पहल नहीं करते।"

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दोषियों की याचिका हुई थी खारिज
जज अरोड़ा निर्भया कांड के दोषी मुकेश कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें फांसी की तारीख को 22 जनवरी से टालने की मांग की गयी थी। दिल्ली सरकार के अनुसार जेल नियमों में दया याचिका खारिज करने और फांसी दिये जाने के बीच 14 दिन का अंतर होना अनिवार्य है। जेल अधिकारियों ने तैयारियां कर ली हैं। दिल्ली की एक अदालत ने सात जनवरी को डेथ वारंट जारी करते हुए कहा था कि चारों दोषियों - मुकेश सिंह(32), विनय शर्मा (26), अक्षय कुमार सिंह (31) और पवन गुप्ता (25) को 22 जनवरी की सुबह सात बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी। हालांकि, दिल्ली सरकार ने उच्च न्यायालय को सुनवाई के दौरान बताया कि दोषियों को निर्धारित तारीख पर फांसी नहीं दी जा सकती क्योंकि एक दोषी मुकेश की दया याचिका लंबित है। दोषी मुकेश और विनय की सुधारात्मक याचिकाओं को उच्चतम न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है। 

निर्भया मामला: दोषी पवन को नाबालिग साबित करने के मामले में वकील एपी सिंह को नोटिस

दिल्ली बार काउंसिल ने दोषियों पर कार्रवाई की, भेजा नोटिस
दिल्ली बार कांउसिल ने शनिवार को निर्भया मामले में दोषी पवन कुमार गुप्ता की ओर से पेश वकील एपी सिंह को नोटिस जारी किया है। बार काउंसिल ने यह कदम पिछले महीने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश पर उठाया जिसमें फर्जी दस्तावेज पेश करने और सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहने के कारण कार्रवाई करने को कहा गया था। बार काउंसिल ने सिंह को नोटिस प्राप्त होने के दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले साल 19 दिसंबर को मृत्युदंड पाए पवन सिंह की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें उसने दिसंबर 2012 को अपराध करने के दौरान नाबालिग होने का दावा किया था और फर्जी दस्तावेज जमा करने और सुनवाई के दौरान अनुपस्थित होने पर सिंह की निंदा की थी। अदालत ने पवन की याचिका दायर करने वाले वकील एपी सिंह पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

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20 जनवरी को होगी सुनवाई
बार काउंसिल ने बताया, 'न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने पिछले साल 19 दिसंबर को दिए अपने आदेश में एपी सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मामले को दिल्ली बार काउंसिल को भेजा था जिन्होंने पवन कुमार गुप्ता की ओर से याचिका दायर की थी।" काउंसिल ने कहा, "अदालत के आदेश का अध्ययन करने के बाद सर्वसम्मति से एपी सिंह को नोटिस जारी करने का फैसला किया गया। उन्हें नोटिस मिलने पर दो हफ्ते में जवाब देने को कहा गया है।" अपराध के समय नाबालिग होने का दावा करने वाली याचिका उच्च न्यायालय से खारिज होने के बाद पवन ने अब उच्चतम न्यायालय का रुख किया है जिसपर 20 जनवरी को सुनवाई होगी।

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