Wednesday, Jun 16, 2021
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बंगाल में आठ चरणों में चुनाव कराने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ याचिका

  • Updated on 3/1/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में विधानसभा चुनाव कराने के निर्वाचन आयोग फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में सोमवार को एक याचिका दायर की गई है। वकील एम एल शर्मा द्वारा दायर याचिका में न्यायालय से आयोग को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह राज्य में आठ चरणों में विधानसभा चुनाव नहीं कराए क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (जीवन के अधिकार)और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है।  

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निर्वाचन आयोग ने 26 फरवरी को पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों के लिए कार्यक्रम की घोषणा की थी। पश्चिम बंगाल में जहां 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच आठ चरणों में चुननाव होंगे वहीं तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में एक चरण में छह अप्रैल को चुनाव होंगे। असम में तीन चरणों में चुनाव होने हैं।  

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याचिका पर अगले कुछ दिनों में सुनवाई होने की उम्मीद है। याचिका में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि वह पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान कथित तौर पर धार्मिक नारे लगाने को लेकर सीबीआई को मामला दर्ज करने का निर्देश दे।  याचिका में कहा गया कि च्च्जय श्री राम और अन्य धार्मिक नारे लगाने से वैमनस्य फैल रहा है’’ यह भादंवि और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत अपराध है।  

उच्च न्यायालय ने कहा - आयोग निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चत करेगा 
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के हलफनामे का संज्ञान लेते हुए एक याचिका का निस्तारण कर दिया जिसमें सुचारू चुनाव कराने को लेकर आशंकाएं जताई गई थीं। हलफनामे में आयोग ने कहा कि वह सुनिश्चित करेगा कि पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराए जाएं। मुख्य न्यायाधीश टी बी एन राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि यह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है कि वह हर विधानसभा क्षेत्र में सुचारू रूप से चुनाव कराए। खंडपीठ ने कहा कि यह न केवल अधिकार और शक्तियों के सिलसिले में है बल्कि जिम्मेदारियों के संबंध में भी है। 

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राज्य के पूर्व महाधिवक्ता विमल चटर्जी की तरफ से दायर जनहित याचिका में खंडपीठ ने कहा कि ‘‘स्वतंत्रत एवं निष्पक्ष चुनाव नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा हैं।’’ पीठ में न्यायाधीश संपा सरकार भी थे। इसने कहा कि अधिसूचना जारी होने के बाद और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तथा परिणाम जारी होने तक अदालत चुनाव के मामलों में हस्तक्षेप करना पसंद नहीं करती है। अदालत ने कहा कि भारत के निर्वाचन आयोग को राज्य में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराना है।

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