Thursday, Dec 01, 2022
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केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका हाई कोर्ट ने की खारिज

  • Updated on 3/30/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया। दरअसल, सीआईसी ने 12 दिसंबर 2018 को हुई उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम की बैठक के एजेंडे की जानकारी मांगने के लिये दाखिल आरटीआई अपील को खारिज करने का आदेश दिया था। सीआईसी के इस आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। 

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कॉलेजियम की उस बैठक में उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में कुछ फैसले लिये गए थे। न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज की याचिका खारिज कर दी। अधिवक्ता प्रशांत भूषण के माध्यम से दाखिल याचिका में याचिकाकर्ता ने सीआईसी के 16 दिसंबर 2021 के आदेश को चुनौती दी थी। 

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याचिका में कहा गया था कि 12 दिसंबर 2018 को हुई बैठक में शामिल रहे न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर ने 23 जनवरी, 2019 को एक साक्षात्कार में इस बात पर निराशा व्यक्त की थी कि कॉलेजियम बैठक की जानकारी को उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया। न्यायमूर्ति लोकुर 30 दिसंबर, 2018 को सेवानिवृत्त हो गए थे। याचिका में कहा गया था,‘‘उन्होंने कहा था, जब हम कुछ निर्णय लेते हैं, तो उन्हें अपलोड किया जाता है। मैं इस बात को लेकर निराश हूं कि ऐसा नहीं किया गया।‘‘

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भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की आत्मकथा‘जस्टिस फॉर द जज’के अनुसार 12 दिसंबर, 2018 को हुई कॉलेजियम की बैठक में राजस्थान उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूॢत प्रदीप नंदराजोग और दिल्ली उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन को उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त किये जाने को मंजूरी मिली थी। 

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पुस्तक में कहा गया है कि यह जानकारी कथित रूप से लीक हो गई थी जिसके बाद इस मामले को न्यायमूर्ति गोगोई ने 15 दिसंबर 2018 को शुरू हुए शीतकालीन अवकाश के चलते जनवरी, 2019 तक के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया। जनवरी 2019 में न्यायमूर्ति लोकुर के सेवानिवृत होने के बाद नए कॉलेजियम का गठन किया गया। 

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पुस्तक के अनुसार नए कॉलेजियम ने 10 जनवरी, 2019 को अपने प्रस्ताव में न्यायमूॢत नंदराजोग और न्यायमूॢत मेनन की नियुक्ति को मंजूरी नहीं दी। भारद्वाज ने 26 फरवरी 2019 को भी आरटीआई आवेदन दाखिल कर बैठक के एजेंडे की जानकारी मांगी थी। हालांकि उच्चतम न्यायालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने इस आधार पर जानकारी देने से इनकार कर दिया था कि प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (एफएए) की नजर में यह ठीक नहीं है।     

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