Tuesday, Jun 28, 2022
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petition dismissed ban on contesting elections for public servants after retirement rkdsnt

रिटायरमेंट के बाद नौकरशाहों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने से जुड़ी याचिका खारिज

  • Updated on 5/1/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उच्चतम न्यायालय ने लोक सेवकों को सेवानिवृत्त होने या नौकरी छोडऩे के तुरंत बाद एक ‘‘निश्चित समयावधि’’ तक चुनाव लडऩे से प्रतिबंधित करने संबंधी जनहित याचिका की सुनवाई से यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि वह कार्यपालिका को कानून लागू करने का निर्देश नहीं दे सकता।  न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने विवेक कृष्ण की याचिका खारिज करते हुए कहा कि लोक सेवकों के चनाव लडऩे के लिए इस तरह की कोई अवधि होनी चाहिये या नहीं, इसे विधायिका पर छोड़ देना चाहिये।  

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     पीठ ने कहा ‘‘इस मामले में याचिकाकर्ता या इनके प्रतिनिधित्व वले व्यक्तियों के किसी भी समूह के किसी भी मौलिक अधिकार के उल्लंघन की कोई शिकायत नहीं है। किसी को भी इस अदालत से ऐसा अनिवार्य आदेश प्राप्त करने का मौलिक अधिकार नहीं है, जिसमें उपयुक्त विधायिका को निर्देश दिया जाए कि वह सिविल सेवकों की चुनाव लडऩे की पात्रता पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाए।’’   

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  शीर्ष अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्रदत्त शक्तियों के बावजूद प्रतिवादियों को कानून लागू करने या नियम बनाने का निर्देश देने के लिए परमादेश जारी नहीं किया जा सकता है। न्यायालय ने कहा कि वह या कोई उच्च न्यायालय विधायिका को कोई विशेष कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकता है। अदालत ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि विशिष्ट चुनाव लडऩे के लिए मानदंड और योग्यता निर्धारित करने को लेकर कानून बनाया जा सकता है।   

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  पीठ ने कहा कि इसमें कोई संशय नहीं है कि लोक सेवकों को कर्तव्यों के निर्वहन में ईमानदारी के उच्चतम नैतिक मानदंडों, राजनीतिक तटस्थता और निष्पक्षता का पालन करना चाहिए। पीठ ने कहा कि नैतिक मानकों को अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए और इसके उल्लंघन पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, जैसा कि अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 में र्विणत है।      

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