Saturday, Sep 19, 2020

Live Updates: Unlock 4- Day 19

Last Updated: Sat Sep 19 2020 08:06 AM

corona virus

Total Cases

5,305,656

Recovered

4,205,340

Deaths

85,625

  • INDIA7,843,243
  • MAHARASTRA1,145,840
  • ANDHRA PRADESH609,558
  • TAMIL NADU530,908
  • KARNATAKA494,356
  • UTTAR PRADESH342,788
  • ARUNACHAL PRADESH325,396
  • NEW DELHI234,701
  • WEST BENGAL215,580
  • BIHAR180,788
  • ODISHA171,341
  • TELANGANA167,046
  • ASSAM148,969
  • KERALA122,216
  • GUJARAT120,498
  • RAJASTHAN109,473
  • HARYANA103,773
  • MADHYA PRADESH97,906
  • PUNJAB90,032
  • CHANDIGARH70,777
  • JHARKHAND56,897
  • CHHATTISGARH52,932
  • JAMMU & KASHMIR52,410
  • UTTARAKHAND27,211
  • GOA26,783
  • TRIPURA20,969
  • PUDUCHERRY18,536
  • HIMACHAL PRADESH9,229
  • MANIPUR7,470
  • NAGALAND4,636
  • ANDAMAN AND NICOBAR ISLANDS3,426
  • MEGHALAYA3,296
  • LADAKH3,177
  • DADRA AND NAGAR HAVELI2,658
  • SIKKIM1,989
  • DAMAN AND DIU1,381
  • MIZORAM1,333
Central Helpline Number for CoronaVirus:+91-11-23978046 | Helpline Email Id: ncov2019 @gov.in, ncov219 @gmail.com
Pitru Paksh 2020  first day of Pitrupaksha special rules law and importance prshnt

Pitru Paksh 2020: आज है पितृपक्ष का पहला दिन, जानें खास नियम, विधि और महत्व

  • Updated on 9/2/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। पितृपक्ष (Pitru Pakash) यानी की श्राद्ध (Shradh) आज 2 सितंबर से शुरू हो रहा हैं और ये 17 सितंबर तक चलेगी। पितृ पक्ष के दौरान पितृों और पूर्वजों के पिंडदान (Pinddan) की विशेष महत्वता होता है। बता दें कि जिन परिवार के जिन पूर्वजों का देहांत हो चुका है, उन्हें पितृ कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार जब तक कोई व्यक्ति मृत्यु के बाद पुनर्जन्म नहीं ले लेता, तब तक वह सूक्ष्मलोक में रहता है। ऐसा मानते हैं कि पितृपक्ष में इन पितरों की पूजा करने से इनका आशीर्वाद सूक्ष्मलोक से परिवार जनों को मिलता रहता है।

पितृपक्ष 2020: आज से शुरू हो रहा है श्राद्ध, जानें क्यों की जाती है पितरों की पूजा

ऐसे करें पितरों खुश
पितृपक्ष में नियमित रूप से पितरों को दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके दोपहर के समय जल अर्पित करें। जल अर्पित करने के लिए इसमें काला तिल मिलाया जाता है और हाथ में कुश रखा जाता है। पितरों को हल्की सुगंध वाले सफेद पुष्प अर्पित करने चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को तर्पण और पिंड दान करना चाहिए। पितृपक्ष में नित्य भगवदगीता का पाठ करें।

जिस दिन पूर्वज की देहांत की तिथि होती है, उस दिन किसी निर्धन को भोजन, अन्न और वस्त्र का दान किया जाता है। इसके बाद पितृपक्ष के कार्य समाप्त हो जाते हैं।

गणपति - अगले बरस तुम जल्दी आना, विघ्नहर्ता को विदाई देते भर आईं आंखें

वर्तमान में स्त्रियां भी कर कर सकती हैं तर्पण और श्राद्ध
आमतौर पर घर का वरिष्ठ पुरुष सदस्य नित्य तर्पण करते हैं लेकिन उसके अभाव में घर को कोई भी पुरुष सदस्य कर सकता है। वर्तमान में स्त्रियां भी तर्पण और श्राद्ध कर सकती हैं। वहीं पितृपक्ष में सात्विक आहार खाएं, प्याज लहसुन, मांस मदिरा से परहेज करें और जहां तक संभव हो दूध का प्रयोग कम से कम करें।

Shradh: पितृपक्ष के दौरान भूलकर भी ना करें ये काम, होता है अशुभ

श्राद्ध का महत्व
श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा से है, जो धर्म का आधार है, हिंदू धर्म में मान्यता है कि मानव शरीर तीन स्तरों वाला है। दृश्यमान देह स्थूल शरीर के अंदर सूक्ष्म शरीर है, जिसमें प्राण, अपान, व्यान, उदान समान, पंचमहाभूत जिसमें पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश, वायु होता है इसके अलावा मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, अविद्या, काम और कर्म होते हैं। इन सभी कारण शरीर होता है। जिसमें सत, रज, तम तीन गुण होते हैं। यहीं आत्मा विद्यमान है। मृत्यु होने पर सूक्ष्म और कारण शरीर को लेकर आत्मा स्थूल शरीर को त्याग देता है।

मान्यता है कि यह शरीर वायवीय या इच्छामय है और मोक्ष पर्यंत शरीर बदलता रहता है।, मरणोपरांत जीव  प्रबल इच्छाशक्ति के चलते यदाकदा स्थूलत: अपने अस्तित्व का आभास करा देते हैं। उचित समय बीतने पर ये पितृ लोक में निवास करते हैं, धर्म ग्रंथों में पितृगण को तृप्त करने हेतु एक पखवारा अलग से निश्चित है। यह भाद्रपद पूर्णिमा से क्वार की अमावस्या तक होता है। जिस तिथि को, जिसका जो पितृ दिवंगत हुआ हो, उस तिथि को उसका श्राद्ध किया जाता है। तीन पिंड दिए जाते हैं- परबाबा, बाबा और पिता। इन्हें भूमि पर कुश बिछाकर अर्पण करते हैं। मुख दक्षिण की ओर करना चाहिए।

 


 

comments

.
.
.
.
.