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pitru paksha 2020 the only place where there is only shraddha of mother prshnt

Pitru Paksha 2020: एकमात्र स्थान जहां होता है सिर्फ माता का श्राद्ध, जानें क्या है महत्व

  • Updated on 9/10/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। इस साल पितृपक्ष (Pitri Paksha 2020) 2 सितंबर से 17 सितंबर तक रहेगा। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दौरान सभी लोग अपने पितरों की पूजा करते हैं और पित्र इससे खुश होकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। धर्म शास्त्रों में श्राद्ध तर्पण आदि का प्रावधान किया गया है ताकि पित्र स्मृतियों में बने रहे और उनके प्रति आदर भाव भी बना रहे। पित्रकर्म कुछ खास जगह पर करने का विशेष महत्व माना जाता है, इसमें से एक गुजरात का सिद्धुपुर है जहां सिर्फ मातृश्राद्ध किया जाता है।

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ऋग्वेद में है सिद्धुपुर से जुड़ी कथा
सिद्धुपुर गुजरात के पाटन जिले में पड़ता है और इसको सिद्ध स्थल के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसा मात्र तीर्थ स्थल है जहां पर सिर्फ मातृ श्राद्ध का प्रावधान है। सिद्धुपुर का वर्णन ऋग्वेद में मिलता है जहां का मुख्य बिंदु सरोवर है। शास्त्रों में सिद्धुपुर के संबंध में एक कथा का वर्णन किया गया है

माना जाता है कि प्राचीन काल में कपिल मुनि नाम के विद्वान संत थे और उनकी माता का नाम देवहुति और पिता का ऋषि कर्दम था। कपिल मुनि को सांख्य दर्शन करनेप्रणेता और भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। बताया गया कि एक समय जब उनके पिता ऋषि कर्दम तपस्या के लिए वन में गए तो उनकी माता देवहूति काफी दुखी हो गई थी।

ऐसे में उनके पुत्र कपिल मुनि ने सांख्य दर्शन की विवेचना करते हुए उनका ध्यान भगवान विष्णु में केंद्रित किया ऐसे में श्रीहरि में ध्यान लगाते हुए माता देवहूति देवलोक गमन कर गई, तब से मान्यता है कि बिंदु सरोवर के तट पर माता के देहावसान के पश्चात कपिल मुनि ने उनकी मोक्ष प्राप्ति के लिए अनुष्ठान किया था। इसके बाद से ही इस स्थान पर मातृ मोक्ष स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

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कार्तिक महीने में लगता है विशाल मेला
कपिल मुनि ने अपनी मां के लिए श्राद्ध कार्तिक महीने में किया था अनुष्ठान इसलिए हर साल यहां पर कार्तिक महीने में विशाल मेले का भी आयोजन होता है और दूरदराज से लोग इस जगह पर अपनी मां का श्राद्ध करने के लिए आते हैं।

सिद्धुपुर के अलावा गुजरात में पितरों को तारने वाला एक और तीर्थ कारक है पिंड कारक द्वारिका से लगभग 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित है इस स्थान पर एक सरोवर है इस तालाब में तीर्थयात्री श्राद्ध कर्म करके पिंड सरोवर में डाल देते हैं इस सरोवर की खासियत यह है कि इसमें डाले गए पेंट डूबते नहीं बल्कि तैरने लगते हैं।

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