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पितृपक्ष 2020: जानें श्राद्ध में क्यों की जाती है पितरों की पूजा

  • Updated on 9/5/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। हिंदू मान्यताओं के अनुसार भाद्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि से हर साल पितृपक्ष का आरंभ हो जाता है इस साल पितरों की पूजा का पक्ष जिसे कुछ लोग श्राद्ध (shradh 2020) पक्ष भी कहते हैं। 2 सितंबर से शुरू हो रहा है। वहीं भद्र पूर्णिमा एक सितंबर को है इसलिए अगस्त मुनि के नाम से इसी दिन पूजन किया जाता है और प्रतिपदा का पहला श्राद्ध एक सितंबर को होगा। बता दें कि श्राद्ध की उत्पत्ति श्रद्धा से हुई है जिसका अर्थ है पितरों के प्रति सच्ची श्रद्धा रखने का पर्व।

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पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार उनका श्राद्ध होता है
हर साल पितृपक्ष में पितरों के तर्पण निमित्त पिंडदान और हवन किया जाता है, सभी लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार उनका श्राद्ध करते हैं और माना जाता है कि जो लोग पितृपक्ष में अपने पितरों का तर्पण नहीं करते। उन्हें पित्र दोष लगता है मान्यता है कि श्राद्ध से पितरों की आत्मा को तृप्ति और शांति मिलती है और इससे खुश होकर वे पूरे परिवार को आशीर्वाद देते हैं।

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बिहार के गया में इस साल नहीं कर पाएंगे पिंडदान
बता दें कि पितरों की आत्मा की शांति के लिए हजारों की संख्या में लोग बिहार के गया जाकर पिंडदान करते हैं। लेकिन इस बार केरोना संकट के कारण यह संभव नहीं हो पाएगा। बिहार सरकार ने इस बार इस पर रोक लगा दी है। ऐसे में सभी लोग अपने घर पर ही पूजन कर्मकांड और दान करेंगे।

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17 सितंबर को होगा पितृपक्ष का समापन
एक सितंबर को शुरू होकर पितृपक्ष का समापन 17 सितंबर को होगा और मल मास आरंभ हो जाएगा। इसी के साथ अंतिम श्राद्ध अमावस्या श्राद्ध के नाम से जाने वाले अंतिम श्राद्ध 17 सितंबर को किया जाएगा और पूर्णिमा का श्राद्ध 2 सितंबर को होगा। वहीं पंचमी का श्राद्ध 7 सितंबर को हो जाएगा 13 अगस्त को एकादशी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार श्राद्ध पक्ष में यमराज मृत जीवों की मुक्त कर देते हैं ताकि वह अपने परिजनों से तर्पण ग्रहण करें और पूरे परिवार को आशीर्वाद देकर जाए।

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