Tuesday, Oct 04, 2022
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PM मोदी ने लाल किले पर 9वीं बार राष्ट्र ध्वज फहराया, कही ये बात  

  • Updated on 8/16/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश की आजादी के 75 वर्ष होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लाल किले पर नौवीं बार राष्ट्र ध्वज फहराया। अपने 83 मिनट के अपने भाषण में उन्होंने देश के सामने 5 प्रण रखे। भ्रष्टाचार, परिवारवाद, भाई-भतीजावाद, भाषा और लोकतंत्र का जिक्र किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के दौर में कदम रख चुका है। इस लड़ाई में उन्होंने देश के हर नागरिक से साथ और आशीर्वाद मांगा। साथ ही कहा कि भ्रष्टाचारियों के प्रति किसी प्रकार की उदारता किसी भी देश को शोभा नहीं देती। प्रधानमंत्री ने लोगों से यह संकल्प लेने का आग्रह किया कि वे ऐसा कुछ नहीं करेंगे, जिससे महिलाओं की प्रतिष्ठा कम होती हो। 

उन्होंने कहा कि बोलने में और आचरण में उन्हें (महिलाओं को) अपमानित करने संबंधी विकृति आई है। भारत की तरक्की के लिए महिलाओं का सम्मान एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और ‘नारी शक्ति’ का समर्थन करने की आवश्यकता है।
मोदी ने 76वें स्वाधीनता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में युवा पीढ़ी से अगले 25 वर्षों में देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को पूरा करने का आह्वान किया। भ्रष्टाचार, परिवारवाद और भाई-भतीजावाद को देश की प्रगति और उसके लक्ष्यों की राह की दो बड़ी चुनौती बताया। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘अब भ्रष्टाचार के खिलाफ मैं साफ देख रहा हूं कि हम एक निर्णायक कालखंड में कदम रख रहे हैं। बड़े-बड़े भी बच नहीं पाएंगे। जो लोग पिछली सरकारों में बैंकों को लूटकर भाग गए, उनकी संपत्तियां जब्त कर के वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे पास 75 साल का अनुभव है, हमने 75 साल में कई सिद्धियां भी प्राप्त की हैं।

हमने 75 साल के अनुभव में नए सपने भी संजोए हैं, नए संकल्प भी लिए हैं। लेकिन अमृत काल के लिए हमारे मानव संसाधन का आप्टिमम आउटकम कैसे हो, हमारी प्राकृतिक संपदा का आप्टिमम आउटकम कैसे हो, इस लक्ष्य को लेकर के हमें चलना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी-कभी हमारा टैलेंट भाषा के बंधनों में बंध जाता है, यह गुलामी की मानसिकता का परिणाम है। हमारे देश की हर भाषा पर गर्व होना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से नया नारा दिया। उन्होंने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया था। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने इसमें जय विज्ञान जोड़ा और अब इसमें जय अनुसंधान जोडऩे का समय आ गया है। अब जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान हो।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत लोकतंत्र की जननी है। मदर ऑफ डेमोक्रेसी है। 75 साल की यात्रा में आशाएं, अपेक्षाएं, उतार-चढ़ाव सब के बीच हरेक के प्रयास से हम यहां तक पहुंच पाए। आजादी के बाद जन्मा मैं पहला व्यक्ति था जिसे लाल किले से देशवासियों का गौरव गान करने का अवसर मिला।’

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