Tuesday, Sep 25, 2018

PM के 'अशार मुबारक' में शामिल होने के क्या हैं राजनीतिक मायने, जानें कौन है दाऊदी- बोहरा समुदाय

  • Updated on 9/14/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। केंद्र सरकार के कई फैसलों से बढ़ता नाराजगी के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता देश के सभी हिस्सों और समाज के लगभग हर समुदाय में देखने को मिलती है, लेकिन मुस्लिम धर्म के मानने वालों की बात करें तो इस दावे पर संदेह होने लगता है। लेकिन इसके बाद भी मुसलमानों का एक तबका ऐसा है जो शुरुआत से मोदी के साथ रहा है। दाऊदी बोहरा समुदाय के नाम से जाने जाना वाला ये तबका मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर प्रधानमंत्री तक के सफर में साथ खड़ा है। आइये जानते हैं कौन ये दाऊदी बोहरा समुदाय...

कौन ये बोहरा समुदाय
मुसलमानों को दो हिस्सों में देखा जाता है, शिया और सुन्नी। इसके अवाला इस्लाम को मानने वाले लोग 72 फिरकों में बंटे हैं। इनमें से एक है बोहरा समुदाय, जो शिया और सुन्नी दोनों में होते हैं। सुन्नी बोहरा हनफी इस्लामिक कानून को मानता और दाऊदी बोहरा शियाओं का हिस्सा माना जाता है।

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देश के इन हिस्सों में है दाऊदी बोहरा समुदाय
शिया से जुड़ा हुआ दाऊदी बोहरा समुदाय गुजरात के सूरत, अहमदाबाद, जामनगर, राजकोट, दाहोद और महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे और नागपुर। राजस्थान के उदयपुर और भीलवाड़ा। मध्य प्रदेश के उज्जैन, इंदौर, शाजापुर और कोलकाता और चेन्नई में बसते हैं। दुनिया में उनकी तादाद पाकिस्तान, ब्रिटेन, अमेरिका, दुबई, ईराक, यमन व सऊदी अरब में देखने को मिलती है। मुंबई में इनका पहला आगमन करीब ढाई सौ वर्ष पहले हुआ था।

अन्य मुस्लिम से खुद को अलग मानता है दाऊदी बोहरा समुदाय
दाऊदी बोहरा समुदाय खुद को समृद्ध, संभ्रांत और पढ़े-लिखे समुदाय के रूप में पेश करता है। इस समुदाय के अधिकतर लोग व्यापार से ताल्लुक रखते हैं और अपने अाप को प्रोग्रेसिव के तौर पर पेश करते हैं। इस समुदाय की एकता भी इसको और सबसे अलग करती है। वे जमीन पर बैठकर एक बड़ी सी थाल में एक साथ खाते हैं। बिना पूछे कोई नया शख्स उनकी थाली में उनके साथ खा सकता है। इसके जरिए ये वैश्विक एकता की मिसाल देते हैं। लेकिन कड़े नियमों के लिए भी ये समुदाय जाना जाता जो इसके लिए खतरा बनते भी नजर ऐ रहे हैं। ये नियम उनके निजी और धार्मिक दुनिया में किसी बाहरी का प्रवेश पर रोक लगाते हैं।

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दाऊदी बोहरा समुदाय के कार्यक्रम में शामिल हुए पीएम मोदी
आज प्रधानमंत्री मोदी ने दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय द्वारा शहीद इमाम हुसैन की याद में होने वाले अशार मुबारक में हिस्सा लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय के 53 वें धर्मगुरू सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन से इंदौर में मुलाकात की। ऐसा पहली बार हुआ जब बोहरा समाज के किसी प्रवचन कार्यक्रम में कोई प्रधानमंत्री शामिल हुआ। 

पीएम मोदी की इस यात्रा के क्या हैं राजनीतिक मायने
पीएम मोदी द्वारा बोहरा मुस्लिम समुदाय के शहीद इमाम हुसैन की याद में होने वाले अशार मुबारक में शामिल होने को कुछ खास मकसद के रूप में देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश में इस साल चुनाव होने वाले हैं, जो पीएम मोदी की इस शिरकत की बड़ी वजह मानी जा रही है। इस यात्रा के जरिए पीएम राज्य में जीत हासिल करने के लिए संदेश देना चाहते हैं। इसके अलावा बोहरा समुदास पर्यावरण रक्षा की पहल और सफाई पसंद के लिए जाना जाता है। यह समुदाय चैरिटेबल ट्रस्ट बुरहानी फाउंडेशन इंडिया 1992 से ही बर्बादी रोकने, रिसाइकलिंग और प्रकृति संरक्षण के लिए काम कर रहा है। इसके अलावा सफाई पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ती है।

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