Tuesday, Nov 30, 2021
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PM Modi''s hand on CM Yogi''s shoulder: Just understand this

CM योगी के कंधे पर PM मोदी का हाथ: जरा इसको भी समझिए

  • Updated on 11/23/2021

नई दिल्ली /अंबरीश कुमार। देश भाजपा के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए बीते तीन दिन राहत देने वाले रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके संबंधों को लेकर कई महीनों से जो अटकले चल रहीं थी उस पर रविवार की दो फोटो से न सिर्फ विराम लग गया बल्कि मोदी ने योगी के साथ अपने विश्वास को भी जग जाहिर किया।

यह पहली बार हुआ जब प्रधानमंत्री मोदी किसी मुख्यमंत्री के साथ कंधे पर हाथ रख इस तरह घूमे हों। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन से लखनऊ में थे। वे राज्यों के डीजीपी और आईजी के सम्मेलन में शामिल हुए और यूपी के राजनैतिक हालात का भी जायजा लिया। उन्होंने योगी आदित्यनाथ से चुनावी माहौल पर लंबी बातचीत की। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया, ‘हम निकल पड़े हैं प्रण करके, अपना तन-मन अर्पण करके, जिद है एक सूर्य उगाना है, अम्बर से ऊंचा जाना है, एक भारत नया बनाना है।’ इस ट्वीट से यूपी में भाजपा की अंदरूनी राजनीति को भी समझा जा सकता है।

याद होगा पिछले साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे तो उसके बाद एक फोटो जारी हुई थी । इस फोटो में बड़ी सी मेज के एक छोर पर मोदी थे तो दूसरे छोर पर योगी। कहने को तो कोरोना प्रोटोकाल का तर्क भी दिया जा सकता है। दरअसल यह वह दौर था जब दिल्ली से भेजे गए नौकरशाह और मोदी के करीबी रहे अरविंद शर्मा को लेकर यूपी की राजनीति गरमाई हुई थी। योगी ने अरविंद शर्मा को वह महत्व नहीं दिया जो दिल्ली चाहता था।

दरअसल योगी को यह लगा कि अरविंद शर्मा यूपी में सत्ता का नया केंद्र बन सकते हैं। इसमें खुद अरविंद शर्मा का भी काम योगदान नहीं रहा। जो कसर बाकी थी, उसे मीडिया और सोशल मीडिया ने पूरी कर दी। तरह- तरह की खबरें चली। अरविंद शर्मा को मुख्यमंत्री आवास के बगल वाली कोठी अरविंद शर्मा को एमएलसी होने के नाते दी जाएगी, उन्हें महत्वपूर्ण मंत्री पद दिया जाएगा, नौकरशाह उन्हे रिपोर्ट करेंगे आदि -आदि। ऐसे  में योगी का भड़कना स्वाभाविक था। नतीजा यह हुआ कि योगी ने अरविंद शर्मा को को भाव ही नही दिया और न ही मंत्रिमंडल में कोई जगह दी। वो एमएलसी बन कर रह गए।

यह पहली बार था कि भाजपा आलाकमान की बात को राज्य स्तर पर नहीं माना गया था। पर मजबूरी यह थी कि दिल्ली योगी को छेडऩे का जोखिम भी नहीं ले सकता था। योगी पूर्वांचल के ताकतवर हिंदू नेता रहे हैं और संघ उन्हे देश भर में हिंदू चेहरे के रूप में पेश कर चुका है। यूपी की जातीय राजनीति में भी वे राजपूतों के शीर्ष नेता माने जाते हैं।  संघ किसी कीमत पर उन्हें नाराज नहीं करना चाहता है। दूसरे उनकी नाराजगी से विधान सभा चुनाव तो चौपट होता। इसी के बाद यह कोशिशें शुरू हुईं कि मोदी का वरदहस्त योगी पर है। चुनावी रैलियों में यह स्पष्ट संदेश देने की प्रक्रिया शुरू हुई और रविवार को इस फोटो संदेश ने बहुत कुछ साफ कर दिया। मोदी की ऐसी निकटता किसी और मुख्यमंत्री के साथ नहीं देखी गई।

यह फोटो पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाली थी। संगठन को भी इससे काफी मदद मिलेगी। यही वजह है कि योगी ने ही नहीं पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो को यूपी बीजेपी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी ट्वीट किया। उन्होंने फोटो के कैप्शन में लिखा, ‘प्रचण्ड विजय की ओर बढ़ते कदम।

हालांकि विपक्षी दल के नेता अखिलेश यादव ने इस फोटो पर तंज करने का मौका नहीं छोड़ा। दो दिन पहले जब एक्सप्रेस वे उद्घाटन के मोके पर मोदी की गाड़ी के पीछे चलते हुए योगी आदित्यनाथ की फोटो वायरल हुई थी तो भी अखिलेश यादव ने इसपर चुटकी ली थी । कोई आश्चर्य नहीं होगा जब यह फोटो चुनावी रैलियों में प्रमुखता से दिखेगी। 

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