Friday, May 14, 2021
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JNU में विवेकानंद की मूर्ति का अनावरण कर लेफ्ट के किले में सेंध लगा पाएंगे PM मोदी

  • Updated on 11/12/2020

नई दिल्ली/ सोहित शर्मा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कैंपस में स्वामी विवेकानंद की एक प्रतिमा का अनावरण करेंगे। ये पहला अवसर नहीं है जब पीएम मोदी स्वामी विवेकानंद के सिद्धांत और संदेश देश के युवाओं तक पहुंचाएंगे, इससे पहले भी कई मौकों पर पीएम इस कार्य को भलिभांति करते आ रहे हैं।

कई मायनों में खास है पीएम मोदी की ये सहभागिता
पीएम मोदी का ये कार्यक्रम इसलिए भी काफी अहम हो जाता है क्योंकि वामपंथी विचारधारा से ओतप्रोत जेएनयू के कई छात्र और छात्रनेता अक्सर पीएम मोदी के विरोध में देखे जाते रहे हैं। ऐसे में अब जेएनयू के किसी कार्यक्रम में पीएम की यह पहली सहभागिता कई मायनों में खास हो जाती है।

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विवेकानंद के सपनों का भारत बनाएंगे पीएम
स्वामी विवेकानंद के प्रति बीजेपी का लगाव कोई आज कल की बात नहीं है। विवेकानंद के विचारों से ओतप्रोत बीजेपी के हर मंच पर विवेकानंद की फोटो दिखना आम बात है। एक समय था जब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपीए सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए और देश में राम राज के साथ-साथ विवेकानंद के सपनों का भारत बनाने की हुंकार भरी थी। उस दौरान मोदी ने कहा था कि विवेकानंद ने सवा सौ साल पहले भारतमाता के जगतगुरु बनने का सपना देखा था, अब हम उनके सपने को साकार करेंगे।'

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विवेकानंद की मूर्ति को लेकर जेएनयू में रहा है विवाद
अब बात करते हैं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की जहां विवेकानंद की मूर्ति को लेकर काफी समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है। अनेकों बार विवेकानंद की मूर्ति को शरारती तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त करने का प्रयास भी किया गया। विवेकानंद की मूर्ति के चबूतरे पर अभद्र भाषा भी लिख दी गई, हालांकि प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से लिखी गई अभद्र भाषा को साफ करा दिया था। इस घटना के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने वामपंथी छात्रों पर आरोप लगाया था।

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वामपंथी ताकतों का अवैध किला रहा है जेएनयू
बता दें कि जेएनयू एक लंबे समय से वामपंथी ताकतों का अवैध किला माना जाता रहा है। यहां लेफ्ट दलों के कब्जे का एक लंबा इतिहास रहा है, लेकिन जब से केंद्र मोदी सरकार आई है तब से वामंपथ की नीव कमजोर पड़ने लगी है। जेएनयू कैंपस में किसी भी क्रम में न आने वाले एबीवीपी का रौब अब यहां नजर आने लगा है। साल 2016 में एम जगदीश कुमार को यहां का वाइस चांसलर बनाया गया। यही वो समय था जब जेएनयू में आतंकी अफजल गुरु को फांसी के खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया था।

देश विरोधी नारों का बीजेपी ने किया था विरोध
उस दौरान जेएनयू में देश विरोधी नारों का बीजेपी ने जमकर विरोध किया किया था। बस यही वामपंथी ताकतों का यहां चरम था, इसके बाद एबीवीपी यहां मौजूद वामपंथी ताकतों पर भारी पड़ती रही। ऐसे में अब पीएम मोदी के हाथों विवेकानंद की एक प्रतिमा का अनावरण होना अपने आप में काफी अहम हो जाता है। 

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स्वामी विवेकानंद की एक प्रतिमा का अनावरण को लेकर हाल ही में जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार ने अपने एक आधिकारिक बयान में कहा था कि,'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 नवंबर को शाम 6:30 बजे विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा का अनावरण वीडियो-सम्मेलन के माध्यम से करेंगे।

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उन्होंने कहा, स्वामी विवेकानंद भारत के सबसे प्रिय बुद्धिजीवियों और आध्यात्मिक नेताओं में से एक हैं और भारत इस बात के लिए गौरव करता है कि ऐसे महापुरुष ने यहां जन्‍म लिया। भारत में स्वतंत्रता, विकास, सद्भाव और शांति के अपने संदेश से युवाओं को उत्साहित किया। स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को जेएनयू के पूर्व छात्रों के समर्थन से विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित किया गया है।'

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