Wednesday, Mar 20, 2019

UP-बिहार में खस्ता हालत कांग्रेस को पहुंचा सकती है नुकसान, ये राज्य दिला सकते हैं सिंहासन

  • Updated on 3/13/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मोदी हटाओ की राजनीति पर चल रही कांग्रेस पार्टी यूं तो जी तोड़ कोशिश कर आम चुनाव में जीत का परचम लहराने को बेताब है। इसी कोशिश में सबसे ज्यादा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार पर भी वो पूरा जोर लगा रही है। लंबे समय से कांग्रेस की इन दोनों ही राज्यों में अच्छी स्थिति नहीं है।

इसके बावजूद पार्टी इन राज्यों में बड़ी जीत हासिल करने की कोशिश में है। ये कोशिश उसके लिए बड़ी गलती सीबित हो सकती है। इस बात से कहा जा सकता है कि कांग्रेस 2004 से 2014 का अपना सफर भूल गई है जब उसने इन राज्यों में सीमित सफलता के बाद भी केंद्र में 10 साल का सफर तय किया था।

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2014 में उत्तर प्रदेश और बिहार का राजनीतिक समीकरण

2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में बीजेपी ने 71, अपना दल ने 2, कांग्रेस ने 2 और सपा ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, बिहार में 40 लोकसभा सीटें हैं जिसमें बीजेपी ने 22 सीटें जीती थी। एलजेपी को 6 सीटें मिली थीं, वहीं आरजेडी को मात्र 4 सीटें मिली थीं जबकि जेडी (यू) को 2 सीटें। कांग्रेस यहां 2014 में 2 सीटें जीती थी।

कांग्रेस के लिए बड़ी गलती साबित हो सकती है ये

इस स्थिति को देखते हुए कांग्रेस की इन दो राज्यों पर की जा रही जी तोड़ कोशिश एक बड़ी गलती साबित हो सकती है। यूपी की बात करें तो बड़ी क्षेत्रीय पार्टी सपा-बसपा का गठबंधन मोदी हटाओ का राजनीति में अहम भूमिका निभा रहा है। कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन के बीच दोस्ताना मुकाबला है। इनका उद्देश्य मोदी हटाओ ही है। वहीं बिहार की बात करें तो विपक्षी दलों के महागठबंधन में वहां की अहम पार्टी शामिल हैं। गठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी), हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (एचएएम), विकासशील इनसान पार्टी (वीआईपी), लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) और वाम दल शामिल हैं। जो कांग्रेस से कही ज्यादा अहम साबित हो सकती है।

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उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की प्रारंभिक स्थिति

कांग्रेस की प्रारंभिक स्थिति की बात करें तो कांग्रेस के दलित मतदाता बसपा में शिफ्ट हो गए, मुसलमानों की पहली प्राथमिकता सपा और दूसरी बसपा हो गई। बचे हुए सवर्ण पूरी तरह से भाजपा में जा चुके हैं। पूरे यूपी में कांग्रेस 10 से ज्यादा लोकसभा सीटों पर इस हालत में नहीं है कि उसका जिक्र भी किया जाए लेकिन राहुल गांधी और उनके सलाहकार यूपी में बड़ी जीत को इस कदर जरूरी मान रहे हैं कि वो सबसे ज्यादा जोर लगाते दिख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा भी हैं राज्य

इन दोनों राज्यों के अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, असम, गुजरात, उत्तराखंड और दक्षिण के राज्य है जिन पर कांग्रेस ज्यादा ध्यान दे सकती है और बड़ा फायदा हासिल कर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है। इन राज्यों के पिछले विधानसभा चुनावों के हिसाब से देखा जाए तो कांग्रेस भाजपा की टक्कर में बराबर पर खड़ी है। भाजपा 2014 के लोकसभा चुनावों में इन राज्यों में लगभग अधिकतम की स्थिति में थी और इस बार इन सभी प्रांतों में उसकी सीटें कम ही हो सकती हैं। छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में भी भाजपा को साफ करने में कामयाब रही है। ऐसे में कांग्रेस का लक्ष्य मध्य प्रदेश की 29, राजस्थान की 25, गुजरात की 26, असम की 14 और महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से ज्यादा से ज्यादा सीटें जीत भाजपा को मात दे सकती है।

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